उत्तराखंड कांग्रेस की गुटबाजी पर लगाम लगाने को पर्यवेक्षक पुनिया की क्लास, प्रदेश प्रभारी का जमकर विरोध
उत्तराखंड कांग्रेस में चल रही कलह को दूर करने के लिए पर्यवेक्षक एआईसीसी के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया ने प्रदेश कांग्रेस के नेताओं की क्लास ली। इस दौरान उन्होंने सभी के साथ बातचीत कर समस्याएं सुनीं और रिपोर्ट तैयार की।

उत्तराखंड कांग्रेस में चल रही कलह को दूर करने के लिए हाईकमान की और से भेजे गए पर्यवेक्षक एआईसीसी के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया ने प्रदेश कांग्रेस के नेताओं की क्लास ली। इस दौरान उन्होंने सभी के साथ बातचीत कर समस्याएं सुनीं और रिपोर्ट तैयार की।
बंद कमरे में बात
एआईसीसी के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया ने बंद कमरे में कांग्रेस के विधायकों, प्रदेश कांग्रेस संगठन के जिला और महानगर अध्यक्षों से बात की। प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव भी उनके साथ थे, लेकिन कुछ समय बाद वह चले गए। प्रदेश प्रभारी को लेकर ही सबसे ज्यादा विरोध की बात सामने आई है। पुनिया ने चकराता विधायक प्रीतम सिंह से काफी देर तक बात की।
तैयारियों का फीडबैक लिया
पुनिया ने नेताओं की बात सुनने के अलावा निकट भविष्य में होने वाले निकाय चुनाव और आम चुनाव के मद्देनजर भी पार्टी और संगठन स्तर पर की जा रही तैयारियों का फीडबैक लिया। पुनिया अपने तीन दिवसीय दौरे की रिपोर्ट हाईकमान को सौंपेंगे। जिसके बाद हाईकमान प्रदेश संगठन और यहां के नेताओं के लिए कुछ जरुरी कदम उठा सकती है।
प्रदेश प्रभारी को लेकर नाराजगी
इससे पूर्व पूर्व सीएम हरीश रावत सहित पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेताओं ने पुनिया से राजपुर रोड स्थित एक होटल में मुलाकात की। पर्यवेक्षक को उत्तराखंड कांग्रेस के अंदर चल रहे बयानबाजी और नाराजगी को दूर करने के लिए भेजा गया। लेकिन नाराज कार्यकर्ता पर्यवेक्षक के आने के बाद भी खुलकर प्रदेश प्रभारी को लेकर नाराजगी जताते रहे।
खुलकर प्रभारी को बदलने की मांग
हालांकि प्रीतम सिंह ने इस दौरान मीडिया से प्रभारी को लेकर कुछ भी नहीं कहा। विधायक मदन बिष्ट ने खुलकर प्रभारी को बदलने की मांग कर डाली। बीते दिनों से जिस तरह से कांग्रेस के अंदर खुलकर बयानबाजी हो रही है और संगठन को किसी तरह से कई सीनियर नेता गंभीरता से नहीं ले रहा हैं, उसका खामियाजा पार्टी को निकाय या आने वाले लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।
गुटबाजी पर लगाम लगाने की कोशिश
यही वजह है कि पार्टी ने पर्यवेक्षक भेजकर बयानबाजी रोकने और पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी पर लगाम लगाने की कोशिश की है। लेकिन जिस तरह से पार्टी के विधायक खुलकर प्रभारी के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस को सख्त कदम उठाने की जरुरत है।
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