उत्तराखंड बजट सत्र: विधानसभा में 22 साल में पहली बार महिलाओं के लिए एक विशेष पहल
उत्तराखंड में विधानसभा सत्र शुरू, महिला स्पीकर ने दी सौगात
देहरादून, 14 जून। मंगलवार से उत्तराखंड में विधानसभा का सत्र शुरू हो गया है। यह सत्र धामी सरकार का पहला बजट सत्र है। सत्र के पहले ही दिन सरकार ने अपना पहला पूर्णकालिक बजट पेश कर दिया है। हालांकि सदन में पहले ही दिन विपक्ष पूरे दिन सरकार पर जमकर हमलावर रही। इधर सदन में 22 साल में पहली बार महिलाओं के लिए अलग से कक्ष का शुभारंभ हुआ। जिसकी हर तरफ तारीफ हो रही है।

महिला विधायकों और महिलाओं के लिए अलग से कक्ष का शुभारंभ
मंगलवार को विधानसभा परिसर में 22 साल में महिलाओं के लिए एक खास पहल हुई है। विधानसभा में पहली बार महिला विधायकों और महिलाओं के लिए अलग से कक्ष का शुभारंभ किया गया है। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण ने कहा कि विधानसभा परिसर में महिलाओं के लिए अलग से कक्ष न होने से कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता था। ऐसे में अध्यक्ष बनने के बाद मैंने इसे प्राथमिकता से हल करने की कोशिश की है। इस मौके पर महिला बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने भी इस पहल का स्वागत किया। इस अवसर पर महिला विधायकों के साथ ही महिला अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहींं। इस कक्ष में महिला मीडियाकर्मी भी अपना काम कर सकेंगे।

बजट सत्र कई मायने में है खास
उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी देहरादून में मंगलवार से धामी सरकार का पहला बजट सत्र शुरू हो गया। यह सत्र कई मायने में खास हो गया है। पहला इस बार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अब विधानसभा के सदस्य के तौर पर शामिल हुए। हाल ही में वे चंपावत से विधायक का चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। ऐसे में धामी के लिए यह सदन का पहला सत्र खास हो गया है। इसके अलावा विपक्ष के लिए भी नेता विपक्ष यशपाल आर्य के रूप में नेतृत्व मिल गया। इससे पहले आयोजित हुए सत्र में बिना नेता प्रतिपक्ष के ही कांग्रेस को पूरे सत्र में सहभागी होना पड़ा था। हालांकि सदन में पहले दिन नेता विपक्ष यशपाल आर्य से ज्यादा सक्रिय और हमलावर प्रीतम सिंह नजर आए।

कांग्रेस गैरसेंण को लेकर हुई जमकर हमलावर
सत्र की शुरूआत में ही विपक्ष ने सरकार को जमकर घेरा है। सदन के बाहर और सदन के अंदर विपक्ष ने सरकार के गैरसेंण की जगह देहरादून में सत्र आयोजित करने पर ग्रीष्मकालीन राजधानी को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। विपक्ष ने प्रश्नकाल शुरू होने से पहले ही जमकर हंगामा किया और सरकार से इस पर चर्चा करने की मांग की। स्पीकर ऋतु खंडूरी भूषण ने इस मांग को दूसरे नियम में चर्चा के लिए स्वीकार करने पर ही विपक्ष शांत हुआ। इसके बाद प्रश्नकाल में भी हरिद्वार ग्रामीण अनुपमा रावत और भगवानपुर की विधायक ममता राकेश ने अपने विधानसभा क्षेत्रों की समस्या को लेकर पीडब्ल्यूडी और सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज को घेरने की कोशिश की। सतपाल महाराज और संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने विपक्षी विधायकों को हावी नहीं होने दिया और एक दूसरे की ढाल बन गए। विपक्ष ने हरिद्वार जनपद में किसानों की समस्या और सिंचाई के संसाधनों को लेकर सरकार से कई सवाल किए। इसके अलावा किच्छा से विधायक तिलकराज बेहड़ ने कोतवाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। जिस पर भी विपक्ष एकजुट नजर आए। इसके बाद बजट पेश करने के बाद गैरसेंण को लेकर चर्चा शुरू हुई। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और भाजपा के सीनियर विधायक बंशीधर भगत के बीच जमकर तू-तू, मैं-मैं हुआ। इसके बाद कांग्रेस के विधायक प्रीतम सिंह ने भी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए।












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