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उत्तराखंड बजट: भाजपा ने बताया संतुलित, समावेशी, हर वर्ग के लिए,कांग्रेस बोली-नई बोतल में पुरानी शराब फार्मूला

​उत्तराखंड विधानसभा में आज धामी सरकार का वर्ष 2024-25 के लिए बजट पेश हो गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने बजट को राज्य को आगामी दशक के श्रेष्ठ राज्य बनाने की अवधारणा पर आधारित बताया है। उन्होंने बजट को संतुलित, समावेशी और हर वर्ग के लिए अवसर वाला बताया है। उन्होंने कहा कि यह बजट समग्र, समावेशी, संतुलित और विकासोन्मुखी है।

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महेंद्र भट्ट ने कहा कि बजट गरीब, युवा, महिला और किसान को समर्पित है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने वर्ष 2024-25 के लिए 89,230 करोड़ रूपए का बजट प्रस्तुत किया गया जो पिछले वर्ष से 15.27 प्रतिशत अधिक है। भट्ट ने कहा कि जिस तरह से बजट मे विकास परियोजनाओं से लेकर युवाओं, महिलाओं के लिए प्राविधान किये गए है तो वहीं हर क्षेत्र मे विकास के लिए विशेष प्रयास है। निश्चित रूप से बजट राज्य मे विकास को और अधिक रफ्तार देगा।

धामी सरकार के बजट को उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने दिशाहीन, प्रतिगामी, विकास विरोधी तथा मंहगाई व बेरोजगारी बढ़ाने वाला चुनावी बजट बजट बताया है। धामी सरकार द्वारा राज्य विधानसभा में पेश किये गये बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि वित्तमंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल ने सदन में जो बजट प्रस्तुत किया है वह दिशाहीन, प्रतिगामी, मंहगाई व बेरोजगारी बढ़ाने वाला तथा राज्य की आर्थिक वृद्धि पर चोट पहुंचाने वाला है।

कहा कि राज्य के वित्त मंत्री द्वारा बजट में विकसित उत्तराखण्ड का सब्जबाग दिखाते हुए योजनाओं का नाम बदल कर नई बोतल में पुरानी शराब वाला फार्मूला अपनाया है। उन्होंने कहा कि राज्य की धामी सरकार द्वारा प्रस्तुत किये गये बजट में नया कुछ भी नहीं है। इस बजट में महंगाई, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, नये रोजगार व पलायन रोकने के कोई प्रावधान नहीं किये गये हैं।

कहा कि बार-बार किसानों की आय दोगुनी करने का ढोल पीटने वाली भाजपा सरकार ने किसानों के लिए बजट में कुछ भी नई घोषणा नहीं की गई है। करन माहरा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2024 के लिए सभी क्षेत्रों में निराशाजनक बजट प्रस्तुत किया गया है। बजट में ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों तथा बेरोजगारों व महिलाओं के सिरका बोझ कम करने के लिए कुछ भी नहीं किया गया है।

कहा कि प्रत्येक वर्ष की भांति बजट का आकार तो बढ़ाया गया है परन्तु आय के नये श्रोत नहीं बताये गये हैं। बजट में ऐसे विभाग जो गांव, गरीब, दलित व कमजोर तबके को लाभ पहुंचाने वाले हैं उनके बजट जैसे कृषि विभाग, समाज कल्याण विभाग, एस.सी.पी., एस.टी.पी., स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, बिजली, पानी तथा पंचायतों के बजट में आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए आंकड़ों की जादूगरी के सिवा कुछ नहीं किया गया है।

करन माहरा ने यह भी कहा कि राज्य सरकार के बजट में स्वयं के संसाधनों से 20891 करोड़ की प्राप्ति दर्शाई गई है जो कि पिछले राजस्व के मुकाबले 3853 करोड़ रूपये कम है। राज्य सरकार के बजट में केन्द्र सरकार के बजट की झूठी घोषणाओं का ढिंढोरा पीटा गया है। बजट घाटे की पूर्ति के लिए आय का कोई स्रोत नहीं सुझाया गया है। कुल मिलाकर राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट में झूठी घोषणाएं तथा कर्ज लेकर घी पीने की कहावत चरितार्थ की गई है।

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