उत्तराखंड: चुनावी साल में रिस्क लेने के मूड में नहीं BJP, इस फॉर्मूले से सुलझाया दो दिग्गज नेताओं का विवाद
त्रिवेंद्र सिंह रावत और हरक सिंह रावत के बीच तनातनी कम करने की कोशिश
देहरादून, 30 सितंबर। उत्तराखंड में चुनावी साल में भाजपा के अंदर शह और मात का खेल जारी है। इस बार पार्टी ने त्रिवेंद्र रावत सरकार के समय से चल रहे एक बड़े विवाद को सुलझाकर पार्टी के सीनियर नेताओं को साफ संदेश दे दिया है कि चुनावी साल में किसी तरह का कोई विवाद नहीं रखा जाएगा जिससे पार्टी की छवि खराब हो। बुधवार को सरकार ने उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में बदलाव कर त्रिवेंद्र सिंह रावत और हरक सिंह रावत के बीच चल रहे विवाद को खत्म कर दिया। राजनीति के जानकार इसे हरक सिंह रावत की जीत मानकर चल रहे हैं तो बीजेपी के अंदर दोनों नेताओं को साफ संदेश देने की चर्चा हो रही है।

हरक और त्रिवेंद्र के बीच का विवाद बना कारण
राज्य सरकार ने उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पद से शमशेर सिंह सत्याल और सचिव मधु नेगी चौहान को भी हटा दिया गया है। अध्यक्ष का जिम्मा सचिव श्रम को दिया गया है। जबकि बोर्ड सचिव पद पीसीएस अफसर अभिषेक त्रिपाठी को सौंपी गई है। कर्मकार कल्याण बोर्ड में अध्यक्ष पर शमशेर सिंह सत्याल की नियुक्ति के बाद से ही श्रम मंत्री हरक सिंह रावत व अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल के बीच तनातनी चल रही थी। जिसका असर अध्यक्ष व सचिव मधु नेगी चौहान के कामकाज पर भी पड़ने लगा था। इस प्रकरण का सीधा असर हरक सिंह और तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत पर भी पड़ा था। जिसके बाद हरक ने त्रिवेंद्र के खिलाफ मोर्चा भी खोला था। त्रिवेंद्र के हटते ही तीरथ के सामने भी हरक ने इस प्रकरण को लेकर कई बार चर्चा की लेकिन तब भी इसका समाधान नहीं निकल पाया था। अब पुष्कर सिंह धामी ने चुनाव से पहले सारे विवादों को खत्म करने की पहल करते हुए बात करते हुए कर्मकार बोर्ड के विवादों को खत्म कर दिया। सरकार ने बोर्ड की पुरानी व्यवस्था को बहाल कर दिया गया। पूर्व में भी अध्यक्ष पद पर सचिव श्रम ही जिम्मा संभालते आए हैं।

हरक ने दिखाया अपना दम
उत्तराखंड की राजनीति में हरक सिंह रावत एक ऐसे नेता हैं जो कि खुलकर बैटिंग करते हैं। कांग्रेस में रहकर भी हरक सिंह ने अपने राजनैतिक और शासकीय कार्यों को लेकर बोल्ड डिसीजन लिए हैं। 2016 में जब कांग्रेस की हरीश रावत सरकार के खिलाफ विद्रोह हुआ तो हरक सिंह ने पूरे घटनाक्रम को अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब बीजेपी में आने के बाद वे हाईकमान से लेकर अपने सीनियर नेताओं से मिलकर अपनी बात मनवाने में कामयाब रहे हैं। बीते दिनों रायपुर विधायक उमेश शर्मा के विवाद में भी उन्होंने खुलकर विधायक का समर्थन किया। अपने बोर्ड के विवाद को लेकर वे कई बार हाईकमान से नाराजगी दर्ज करा चुके हैं। हाल ही में हरक दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर भी आए। इसके बाद ही प्रकरण का पटाक्षेप हुआ है। साफ है कि हाईकमान ने भी चुनाव से पहले इस विवाद को खत्म करने के निर्देश दिए। जिसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा निर्णय लिया है।

त्रिवेंद्र सरकार से हुआ विवाद धामी सरकार में निपटा
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल से कर्मकार बोर्ड के विवादों की शुरुआत हुई थी। पहले सचिव पद से दमयंती रावत को हटाया गया। इसके बाद अध्यक्ष पद से श्रम मंत्री हरक सिंह रावत हटाकर शमशेर सिंह सत्याल की अगुवाई में बोर्ड का गठन किया गया। इसके बाद सरकार के निर्देशों पर बोर्ड का विशेष ऑडिट शुरू किया गया। इस बीच मुख्यमंत्री बदल गए। यहां से विवादों का दूसरा चरण शुरू हुआ। सीएम बदलने के बाद सबसे पहले सचिव पद से दीप्ति सिंह को हटाकर सरकार ने मधु नेगी चौहान को जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद अध्यक्ष और सचिव के बीच तनातनी शुरू हो गई। अब पुष्कर सिंह धामी ने इस विवाद को खत्म कर दिया है।

ये था पूरा विवाद
उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड श्रमिक हितों के कल्याण के उद्देश्य से बनाया गया है। 2017 में भाजपा की सरकार आई श्रम मंत्री डा हरक सिंह रावत बोर्ड के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी देख रहे थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अक्टूबर 2020 में हरक सिंह रावत को अध्यक्ष पद से हटाकर शमशेर सिंह सत्याल को अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। सत्याल को पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र का करीबी माना जाता है। तब भी श्रम मंत्री हरक सिंह ने उन्हें हटाने का विरोध किया था। बाद में त्रिवेंद्र सरकार ने बोर्ड का नए सिरे से गठन कर दिया। सत्याल की अध्यक्षता वाले बोर्ड ने 2020 नवंबर में पिछले बोर्ड के फैसले पलट दिए। इसके बाद पिछले बोर्ड के कार्यकाल के आडिट, बोर्ड की ओर से साइकिल वितरण में कथित गड़बड़ी, ईएसआइ अस्पताल के लिए 20 करोड़ की राशि बतौर ऋण देने संबंधी मामलों को लेकर सरकार ने एक्शन लिया। नेतृत्व परिवर्तन के बाद तीरथ सरकार ने बोर्ड की सचिव का जिम्मा श्रमायुक्त दीप्ति सिंह से हटाकर हरिद्वार की उपश्रमायुक्त मधु नेगी चौहान को सौंप दिया। इसके बाद से बोर्ड के अध्यक्ष और सचिव के बीच भी विवाद होता रहा। हरक सिंह लगातार बोर्ड अध्यक्ष के अधिकारों से बाहर फैसले लेने का आरोप लगाते रहे। हरक ने कई बार मीडिया में आकर सरकार के खिलाफ मोर्चा भी खोला। त्रिवेंद्र सीएम से हटे तो हरक सिंह ने ढ़ेचा प्रकरण पर उनको घेरना शुरू कर दिया। जिसके बाद त्रिवेंद्र और हरक में लगातार तनातनी बनी रही है।












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