Uttarakhand: नीति माणा गांव की जनजातीय महिलाओं ने पीएम मोदी को भोजपत्र पर भेजी खास भेंट, जानिए क्या
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उत्तराखंड के नीति माणा गांव की जनजातीय महिलाओं ने भोजपत्र पर बदरीनाथ की आरती भेजकर आभार व्यक्त किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उत्तराखंड के नीति माणा गांव की जनजातीय महिलाओं ने भोजपत्र पर बदरीनाथ की आरती भेजकर आभार व्यक्त किया है। बता दें कि बीते साल 21 अक्टूबर को जब पीएम मोदी बदरीनाथ पहुंचे थे तो माणा गांव की सरपंच बीना बड़वाल ने मोदी को भोज पत्र पर अभिनंदन पत्र सौंपा था, हरी, लाल और काली स्याही से इस अभिनंदन पत्र को लिखा गया था। जिसे देखकर पीएम अभिभूत नजर आए और मोदी ने ट्विट कर इस बात का जिक्र किया था।

इसके बाद स्थानीय लोगों ने पीएम मोदी की प्रेरणा से भोज पत्र पर फोकस करते हुए इससे स्थानीय उत्पादों पर फोकस किया। चमोली के जिला सूचना अधिकारी रविंद्र नेगी ने बताया कि पीएम मोदी के बदरीनाथ दौरे के बाद से स्थानीय महिलाओं ने भोज पत्र पर आरती समेत कई अन्य कलाकृतियां उकेरी। जो कि पर्यटक और श्रद्धालुओं के लिए खासा आकर्षक हो रहा है। इससे जहां रोजगार बढ़ रहा है, तो वहीं लोगों को कुछ नया देखने और खरीदने को मिल रहा है। भोजपत्र के इस नए काम की पीएम मोदी से मिली प्रेरणा की वजह से ही महिलाओं ने पीएम को आरती लिखा भोजपत्र भेजा है।
नीती घाटी के द्रोणागिरी, कागा, गरपक, लाता गांव के जंगलों में भोजपत्र के पेड़ प्राकृतिक रुप से उगते हैं। भोजपत्रों से पुराने लोग पत्राचार और शादी कार्ड तक बनाते थे। इन पत्रों पर लिखाई कई वर्षों तक मिटती नहीं है। भोजपत्र कभी खराब नहीं होता है। ये पेड़ करीब 16 हजार फीट की ऊंचाई में पाए जाते हैं। भोजपत्र हिमालय क्षेत्र में उगने वाला एक वृक्ष है। इसकी छाल सफेद रंग की होती है जो प्राचीन काल से ग्रंथों की रचना के लिये उपयोग में आती थी।
भारतीय वन अनुसंधान केंद्र देहरादून के वैज्ञानिक कहते है कि भोजपत्र का उपयोग दमा और मिर्गी जैसे रोगों के इलाज में किया जाता है। उसकी छाल बहुत बढि़या एस्ट्रिंजेट यानी कसावट लाने वाली मानी जाती है। इस कारण बहते खून और घावों को साफ करने में इसका प्रयोग होता है। उत्तराखंड में गंगोत्री के रास्ते में 14 किलोमीटर पहले भोजवासा आता है। भोजपत्र के पेड़ों की अधिकता के कारण ही इस स्थान का नाम भोजवासा पड़ा था।












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