उत्तराखंड की सियासत में विरासत को बचाने के लिए चुनावी मैदान में है ये दिग्गज, जानिए क्या है मामला
हरदा, बहुगुणा, खंडूरी, हरक के परिजन चुनावी मैदान में
देहरादून, 1 फरवरी। उत्तराखंड में होने जा रहे विधानसभा चुनाव कई दिग्गजों के लिए खास है। जो अपने नई पीढ़ी को इस चुनाव में जीताकर अपनी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। प्रदेश की राजनीति के खास चेहरे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, विजय बहुगुणा, बीसी खंडूडी और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के परिवार से चुनाव मैदान में हैं, जिससे सियासत की विरासत का भविष्य भी तय होगा।

हरदा, बहुगुणा, खंडूरी, हरक के परिजन चुनावी मैदान में
उत्तराखंड में हो रहे चुनावों में इस बार सियासी दलों ने परिवारवाद का विरोध किया। हालांकि कांग्रेस में हरीश रावत और उनकी बेटी अनुपमा रावत को छोड़कर किसी भी नेता के परिवार में दो टिकट नहीं दिए गए। लेकिन परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए हरक सिंह रावत की बहू अनुकृति गुंसाई, दिवंगत इंदिरा ह्रदयेश के बेटे सुमित ह्रदयेश को भी टिकट दिया गया। वहीं भाजपा ने एक परिवार से दो टिकट तो नहीं दिये, लेकिन सियासत की विरासत को संभालने के लिए कई परिवार को टिकट दिए हैं। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे सौरभ बहुगुणा, पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी की बेटी ऋतु भूषण खंडूरी, पूर्व विधायक हरभजन सिंह चीमा के बेटे त्रिलोक चीमा को भी टिकट दिया गया। जिनके सामने अपने पिता के विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी है।
चुनाव परिणाम तय करेगा राजनीतिक भविष्य
कांग्रेस के बड़े नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत हरिद्वार ग्रामीण से किस्मत आजमा रही हैं। खास बात ये है कि कांग्रेस ने परिवारवाद में किसी को टिकट नहीं दिया। सिर्फ चुनाव अभियान की कमान संभाल रहे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और उनकी बेटी अनुपमा रावत ही एक परिवार से दो टिकट लेने में सफल रहे। ये चुनाव हरीश रावत के लिए जहां आखिरी चुनाव माना जा रहा है। वहीं अनुपमा की जीत हार भी उनका भविष्य तय करेगा। इतना ही नहीं अनुपमा रावत को हरिद्वार ग्रामीण सीट पर ही उतारा गया है। जहां 2017 में हरीश रावत बतौर मुख्यमंत्री चुनाव हार गए थे। भाजपा ने भी पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे सौरभ बहुगुणा को एक बार फिर सितारगंज से टिकट दिया है। जहां से वे 2017 में विधायक चुनकर आए थे। इस सीट पर विजय बहुगुणा उपचुनाव जीते थे, इसके बाद 2017 में भाजपा में आने के बाद विजय बहुगुणा ने ये टिकट अपने बेटे को दिलवा दिया। इस बार सौरभ के सामने परिवार की विरासत को बचाए रखने की जिम्मेदारी है। पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी की बेटी का पहले भाजपा ने यमकेश्वर से टिकट काटा उसके बाद कोटद्वार से टिकट दे दिया। माना जा रहा है कि 2012 में बतौर मुख्यमंत्री खंडूरी की हार का बदला लेने के लिए भाजपा इमोशनल कार्ड खेल रही है। ऐसे में ऋतु भूषण खंडूरी के सामने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को बचाने का भी मौका दिया गया है। अब बात उत्तराखंड की राजनीति के खिलाड़ी माने जाने वाले हरक सिंह रावत की। हरक सिंह ने भाजपा से अपनी बहू अनुकृति गुंसाई के लिए टिकट मांगा तो भाजपा ने इनकार कर दिया। इसके बाद हरक सिंह को भाजपा ने निष्कासित कर दिया। हरक सिंह कांग्रेस में चले गए और अपनी बहू को टिकट दिला दिया। हालांकि इसके बदले हरक सिंह रावत को चुनाव न लड़ने का फरमान सुनाया गया। अब हरक सिंह की राजनीतिक विरासत को बचाने का पूरा जिम्मा अनुकृति गुंसाई पर आ गया है।












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