कांग्रेस में हार के बाद मची रार, तो भाजपा में जीत के बाद भी संगठन में होगा बदलाव, जानिए क्यों

सरकार का गठन होते ही भाजपा संगठन में भी बदलाव तय

देहरादून, 19 मार्च। विधानसभा चुनाव निपटने के बाद प्रदेश की दोनों सियासी दल भाजपा और कांग्रेस के संगठन में बदलाव होना तय है। कांग्रेस में जहां हार के बाद जमकर रार मची हुई ​है और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल तक इस्तीफा दे चुके है। अब भाजपा में सरकार के गठन का इंतजार है। जिसके बाद संगठन में भी बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में सबसे पहले प्रदेश अध्यक्ष की विदाई तय मानी जा रही है। जिस पर पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और ​रमेश पोखरियाल निशंक के साथ ही कुछ सीनियर विधायकों के नाम रेस में बताए जा रहे हैं।

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आधा दर्जन विधायकों ने लगाया था भितरघात का आरोप
भाजपा ने प्रदेश में 47 सीटें जीतकर भले ही इतिहास रचा हो, लेकिन पार्टी के अंदर भितरघात जैसे गंभीर आरोपों पर अब भी जांच होनी बाकि है। विधानसभा चुनाव में हुई अंधरूनी कलह का असर लोकसभा चुनाव में न दिखे इसके लिए भाजपा संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव होना तय है। सबसे पहले प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक की कुर्सी ही खतरे में बताई जा रही है। मदन कौशिक को संगठन से फिर सरकार में फिट किया जा सकता है। उनकी जगह पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, रमेश पोखरियाल निशंक या फिर किसी विधायक को प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी सौंपे जाने की चर्चा है। ऐसे में 22 मार्च को सरकार के गठन के बाद अब भाजपा संगठन में भी बदलाव होना तय है। भाजपा में चुनाव निपटने के बाद सबसे पहले लक्सर से विधायक रहे संजय गुप्ता ने प्रदेश अध्यक्ष पर ही चुनाव में उन्हें हराने का आरोप लगाया था। संजय गुप्ता के अलावा पूर्व मंत्री और विधायक विशन सिंह चुफाल, पूर्व विधायक केदार सिंह रावत, काशीपुर के पूर्व विधायक हरभजन सिंह चीफा, चंपावत से कैलाश गहतोड़ी चुनाव में भितरघात के आरोप लगा चुके हैं। इनमें से संजय गुप्ता और केदार सिंह रावत चुनाव हार चुके हैं।

मुख्यमंत्री की हार की समीक्षा भी होनी तय
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी अपना चुनाव हार गए इसके लिए भी अंदरखाने भितरघात के आरोप लग रहे हैं। जिसका जांच भी भाजपा करा सकती है, आखिर मुख्यमंत्री कैसे चुनाव हार गए। पुष्कर सिंह धामी दोबारा ​मुख्यमंत्री बने तो कहां से चुनाव लड़ेंगे ये भी बड़ा सवाल सामने आना तय है। जिससे कि भविष्य में किसी भी तरह से संगठन में बिखराव न हो और एकजुटता से लोकसभा चुनाव तक पार्टी नजर आए। ऐसे में साफ है कि आने वाले दिनों में भाजपा के अंदर भी घमासान मचना तय है। जिसके लिए हाईकमान पहले ही प्लानिंग कर संगठन में बड़े स्तर से फेरबदल करने की तैयारी में हैं।
कांग्रेस में हार को लेकर होगी समीक्षा
कांग्रेस में अब होली के रंग लगते ही अब हार के रंग भी आने वाले दिनों में दिखने तय हैं। जिस तरह से हरीश रावत खेमा और प्रीतम ​खेमा एक दूसरे के सामने मोर्चा खोले हुए हैं। उससे आने वाले दिनों में कांग्रेस की कलह फिर से बढ़ सकती है। ऐसे में हाईकमान को किसी नए चेहरे पर ही दांव खेलना होगा। जिससे दोनों गुटों का वर्चस्व खत्म हो। ​इसके लिए नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी भी कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी टेंशन है।

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