उत्तराखंड में पोर्टफोलियो के लिए मंत्रियों का लंबा इंतजार, हैवीवेट विभागों में बड़े बदलाव के मिल रहे संकेत
ज्यादातर मंत्रियों को पुराने विभाग रिपीट करने की चर्चा
देहरादून, 25 मार्च। उत्तराखंड में धामी सरकार के मंत्रिमंडल को विभागों के बंटवारे के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। पहले दिन कैबिनेट की व्यस्तता और दूसरे दिन उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के कारण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अब तक नए मंत्रियों को विभागों का बंटवारा नहीं किया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि हैवीवेट विभागों के लिए ज्यादा मारामारी है। हालांकि चर्चा है कि ज्यादातर मंत्रियों को पुराने विभाग रिपीट किए जा सकते हैं।

सुबोध उनियाल का कद बढ़ाए जाने की चर्चा
प्रदेश में 23 मार्च को धामी सरकार के मंत्रिमंडल का गठन हो चुका है। लेकिन दो दिन बाद भी मंत्रियों को विभाग नहीं मिल पाए हैं। इस बार सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल, धन सिंह रावत, गणेश जोशी, रेखा आर्य को फिर से मंत्रिमंडल में जगह मिली है। पुराने मंत्रियों में सुबोध उनियाल का कद बढ़ाए जाने की चर्चा है। सतपाल महाराज, धन सिंह रावत, गणेश जोशी और रेखा आर्य को अधिकतर पुराने विभाग सौंपने की चर्चा है। लेकिन अंदरखाने हैवीवेट विभागों में फेरबदल होने को लेकर भी कयासबाजी शुरू हो गई है। सतपाल महाराज के पास सिंचाई, पीडब्ल्यूडी जैसे भारीभरकम विभाग रह चुके हैं। सुबोध उनियाल शासकीय प्रवक्ता के साथ ही कृषि मंत्री रहे हैं। धन सिंह के पास पहले कार्यकाल में चिकित्सा और उच्च शिक्षा विभाग रहा है। गणेश जोशी सैनिक कल्याण और उद्योग मंत्री का जिम्मा संभाल चुके हैंं। रेखा आर्य महिला एवं बाल विकास की जिम्मेदारी संभाल चुके हैंं। इस बार चंदनराम दास, प्रेमचंद्र अग्रवाल और सौरभ बहुगुणा नए चेहरे हैं।
नए मंत्रियों के मंत्रालय को लेकर माथापच्ची
सबसे ज्यादा माथापच्ची नए मंत्रियों के मंत्रालय को लेकर ही हो रही है। प्रेमचंद अग्रवाल को आबकारी और संसदीय कार्य मंत्री का जिम्मा सौंपा जा सकता है। प्रेमचंद को स्पीकर के साथ ही संसदीय जानकारी होने के चलते अहम जिम्मा सौंपा जा सकता है। इसके साथ ही सौरभ बहुगुणा को समाज कल्याण और परिवहन की जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। शुक्रवार को भी मंत्रियों को विभाग के बंटवारे का इंतजार रहा। लेकिन मंत्रियों के इंतजार लंबे हो सकते हैं। इसके साथ ही 3 मंत्रियों की सीट खाली होने से विभागों का कैसा बंटवारा होगा, इसको लेकर भी मुख्यमंत्री को होमवर्क की आवश्यकता होगी। सबसे ज्यादा जिन विभागों पर नजर रहेगी, उनमें शिक्षा, चिकित्सा, पीडब्ल्यूडी, आबकारी, शहरी विकास, पेयजल,परिवहन जैसे अहम विभाग हैं।












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