उत्तराखंड का शक्तिमान प्रकरण, जब एक बेजुबां जानवर की मौत ने बदल दी थी प्रदेश की सियासत
भाजपा विधायक गणेश जोशी पर लगे थे गंभीर आरोप
देहरादून, 24 सितंबर। उत्तराखंड विधानसभा के 2017 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले विवादों में रहा शक्तिमान प्रकरण 2022 विधानसभा चुनाव से पहले सुलझ गया है। जिसके बाद भाजपा के मसूरी विधायक और कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने राहत की सांस ली है। कोर्ट ने गणेश जोशी को शक्तिमान प्रकरण में क्लीन चिट मिल गई है। बता दें कि शक्तिमान प्रकरण उत्तराखंड की सियासत का अहम किरदार रहा हैा शक्तिमान प्रकरण देश विदेश में चर्चा का विषय बना रहाा हालांकि विधानसभा चुनावों मेंं इस प्रकरण का कोई नुकसान भाजपा को नहीं हुआ थाा

विधायक गणेश जोशी पर हुआ मुकदमा और जाना पड़ा जेल
14 मार्च 2016 को बजट सत्र के दौरान तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ भाजपा ने विधानसभा के पास विरोध प्रदर्शन और रैली निकाली। इस दौरान विधानसभा को जाने वाले रास्ते रिस्पना पर पुलिस ने सुरक्षा चाकचौबंद कर दी। इस बीच भाजपा के कार्यकर्ता गणेश जोशी के नेतृत्व में विधानसभा कूच के लिए निकले। रिस्पना पर पुलिस का घुड़सवार दस्ता मुस्तैद था, जिसमें पुलिस का शक्तिमान घोड़ा सबसे आगे था। तब आरोप लगा था कि जब घुड़सवार ने गणेश जोशी और भाजपा के कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश की तो गणेश जोशी ने पुलिस से डंडा छीनकर जमीन पर वार किए, इसी दौरान शक्तिमान की टांग पर भी चोट लगी। जिससे शक्तिमान की टांग टूट गई और वह जमीन पर गिर गया। घायल हुए शक्तिमान की एक टांग को काटना पड़ा था, क्योंकि चोट की वजह से गैंगरीन हो गया था। जिसके बाद शक्तिमान को नकली टांग लगाई गई थी। शक्तिमान की नकली टांग अमेरीका से मुफ्त में आई थी। लेकिन 20 अप्रैल 2016 को पुलिस लाइन में उपचार के दौरान शक्तिमान की मौत हो गई।

जमकर हुई राजनीति
उत्तराखंड पुलिस के घोड़े शाक्तिमान के घायल होने से लेकर मौत के बाद इस प्रकरण में जमकर राजनीति हुई। इस प्रकरण को लेकर पुलिस की और से गणेश जोशी समेत 5 पर मुकदमा दर्ज किया गया था। गणेश जोशी को कुछ दिन जेल में भी रहना पड़ा। बाद में भाजपा सरकार के आने पर गणेश जोशी पर चल रहे मुकदमें वापस ले लिए गए। शक्तिमान का प्रकरण उत्तराखंड से लेकर देश विदेश तक हाईप्रोफाइल बन गया। यह मामला विदेशों में भी चर्चा का विषय बना रहा। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने शक्तिमान की याद में शहर के रिस्पना चौक का नाम शक्तिमान चौक रखा और वहां घोड़े की मूर्ति लगाने की तैयारी भी की थी। लेकिन बाद में मूर्ति को रातों रात हटवा दिया गया। जिस पर तत्कालीन सीएम हरीश रावत पर भाजपा ने राजनीति करने का आरोप लगाया था। चुनाव नजदीक थे तो कांग्रेस ने विवाद से पल्ला झाड़ दिए। इसके बाद पुलिस लाईन में बने पेट्रोल पंप का नाम शक्तिमान के नाम पर रखा गया।

चुनावी साल में गर्माया शक्तिमान प्रकरण
कोर्ट से क्लीन चिट मिलते ही भाजपा के कार्यकर्ता गणेश जोशी को बधाई देने पहुंच गए। भाजपा ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर इस प्रकरण का राजनैतिक लाभ लेने का आरोप लगाया था। चुनावी साल में भाजपा को एक बार फिर शक्तिमान प्रकरण से कांग्रेस पर हमलावर होने का मौका मिल गया है। 2017 के विधानसभा चुनावों मेंं जिस तरह से कांग्रेस ने इस प्रकरण को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश की थी, ठीक 2022 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा शक्तिमान प्रकरण से कांग्रेस को घेरने की कोशिश करेगी।












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