जीरो टॉलरेंस की सरकार पर भ्रष्ट्राचार का प्रहार, जानिए क्या है सहकारिता घोटाला, जिसको लेकर मचा है बवाल
धामी सरकार पर भ्रष्ट्राचार के गंभीर आरोप
देहरादून, 11 अप्रैल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने दूसरे कार्यकाल को संभालते ही एक बार फिर जीरो टॉलरेंस वाली सरकार का दावा कर रहे हैं। लेकिन सरकार के एक माह होने से पहले ही सरकार भ्रष्ट्राचार के गंभीर आरोप लग रहे हैंं। कांग्रेस अब इस मुद्दे को लेकर सड़कों पर उतर चुकी है। इस बीच सहकारिता मंत्री डॉ.धन सिंह रावत के निर्देश पर शासन ने इस मामले की जांच शुरू कराई है, जो जारी है। जांच प्रभावित न हो, इसको देखते हुए शासन की ओर से कुछ अफसरों को हटाया गया है।आरोप है कि जिला सहकारी बैंक में चतुर्थ श्रेणी के पदों पर हुई नियुक्ति में भारी पैमाने पर घपला किया गया है। जिसमें अफसरों व नेताओं ने अपनों-अपनों को नियुक्ति दिलवाई है। कांग्रेस इस मामले में सरकार पर एसआईटी जांच से बचने का आरोप भी लगा रही है। आरोप है कि घोटाले की जांच के लिए महज़ विभागीय समिति बना खानापूर्ति की जा रही है। सरकार के एक माह के कार्यकाल से पहले ही भ्रष्ट्राचार का आरोप लगना धामी सरकार की मुश्किलें खड़ी कर रहा है।

क्या है प्रकरण
भाजपा की 2017 से 2022 के कार्यकाल में बैंक के चतुर्थ श्रेणी के 423 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। प्रदेश के तीन जिलों के रिजल्ट के बाद यह घपला सामने आया। सरकार का कहना है कि इसकी जांच शुरू कर दी गयी है। और 15 दिन के अंदर जांच रिपोर्ट आ जायेगी। कांग्रेस इस पूरे प्रकरण में सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत से इस्तीफा मांग रहे हैं। साथ ही आरोप है कि जब पूर्ववर्ती सरकार के समय में भी सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत थे तो आरोप लगने के बाद फिर से धन सिंह को ही विभाग क्यों सौंपा गया है। आरोप है कि कॉ-ओपरेटिव बैंक भर्ती में रिश्तेदारों और चहेतों का चयन किया गया।
मामले की जांच शुरू, कुछ अफसरों को हटाया गया
इस बीच सहकारिता मंत्री डॉ.धन सिंह रावत के निर्देश पर शासन ने इस मामले की जांच शुरू कराई है, जो जारी है। जांच प्रभावित न हो, इसको देखते हुए शासन की ओर से कुछ अफसरों को हटाया गया है।जांच शुरू होने के बाद पहली गाज चार जिलों के जिला सहायक निबंधक (एआर) और चार महाप्रबंधकों (जीएम) पर गिरी है। चारों एआर और तीन महाप्रबंधकों का तबादला कर दिया गया है, जबकि डीसीबी देहरादून की महाप्रबंधक का सेवा विस्तार समाप्त कर दिया गया है। उधर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि सहकारी बैंक घपले ने भाजपा के भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टालरेंस के दावे की कलई खोल दी है। गोदियाल ने कहा कि सरकार इस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। यदि सरकार की नीयत साफ है तो पिछले पांच साल से सहकारिता विभाग देख रहे मंत्री धन सिंह रावत को दोबारा यही विभाग क्यों दिया गया है। जांच की निष्पक्षता के लिए उन्हें तत्काल इस विभाग से हटाया जाना चाहिए। सोमवार को सहकारिता विभाग में हुई भर्ती घोटाले को लेकर कांग्रेस ने सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन कर धरना दिया। इस दौरान पूर्व सीएम हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल समेत तमाम कांग्रेसी दिग्गजों धरने पर बैठे। कांग्रेस नेताओं ने सहकारिता विभाग में भर्ती की सीबीआई जांच की मांग की है। साथ ही धन सिंह रावत का इस्तीफा मांगा है।












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