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धामी सरकार के विभागीय मंत्री ने अपने ही अधिकारियों पर लगाया कुचक्र रचने का आरोप, जानिए क्या है मसला

परिवहन और समाज कल्याण मंत्री ने अपने विभागीय अधिकारियों पर ही सवाल खड़े किए

देहरादून, 8 अप्रैल। धामी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मंत्री भी फुल फॉर्म में नजर आ रहे हैं। मंत्रियों ने अपने 100 दिन के एजेंडे पर फोकस करने के साथ ही विभागीय अधिकारियों के पेंच कसने शुरू कर दिए हैं। परिवहन और समाज कल्याण मंत्री चंदनराम दास ने अपने विभागीय अधिकारियों पर ही सवाल खड़े किए हैं। मंत्री का कहना है कि अधिकारियों ने डिपो के विलय का कुचक्र रचा था। जानकारी होते ही उन्होंने तुरंत ​कदम उठाते हुए तीन घंटे के अंदर आदेश रद्द कर दिया। उन्होंने कहा कि अब भविष्य में भी डिपो के विलय की अटकलें नहीं लगेंगी। आईएसबीटी के लिए जमीन का निरीक्षण किया जाएगा। परिवहन मंत्री ने बताया कि आईएसबीटी के लिए हमारे पास काफी जमीन है। जमीन का स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा। आने वाले समय में इसके लिए अच्छा मार्ग होगा। संकल्प पत्र को देखते हुए हमने 100 दिन का एक रोडमैप तैयार किया है।

The departmental minister of Dhami government accused his own officers of creating a vicious circle, know what is the issue

परिवहन निगम में चार डिपो के एकीकरण का फैसला बिना मंत्री के संज्ञान ​के एक प्रयोग

परिवहन निगम को घाटे से उबारने के लिए विभागीय अधिकारियों ने बिना मंत्री के संज्ञान ​के एक प्रयोग करना चाहा तो इसकी भनक मंत्री को लग गई। परिवहन निगम में चार डिपो के एकीकरण का फैसला लिया। लेकिन 24 घंटे में ही निगम के आदेश से नाराज होकर परिवहन मंत्री चंदन रामदास ने इसे स्थगित कर दिया। उन्होंने मामले में मुख्य सचिव से भी बात की है। परिवहन निगम की एमडी ने रानीखेत डिपो को भवाली डिपो में, काशीपुर को रामनगर में, श्रीनगर को ऋषिकेश में और रुड़की को हरिद्वार डिपो में विलय करने का आदेश जारी किया था। इसके साथ ही विलय होने वाली डिपो की सभी बसें, पूरा स्टाफ भी संबंधित डिपो का हिस्सा बना दिया गया था। परिवहन मंत्री चंदन रामदास को जैसे ही इसकी जानकारी मिली तो वह नाराज हो गए। उनका कहना था कि उनके संज्ञान में लाए बिना ही परिवहन निगम ने यह फैसला लिया है। उन्होंने तत्काल इस आदेश को स्थगित करने के आदेश जारी कर दिए। साथ ही उन्होंने मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधू से भी इस मामले पर बातचीत की और बिना संज्ञान में लाए निर्णय लेने पर नाराजगी जताई।

मंत्रियों को अपने विभागीय अधिकारियों की सीआर लिखने का अधिकार देने की मांग तेज

विभागीय अधिकारियों के इस फैसले के बाद से एक बार फिर मंत्रियों को अपने विभागीय अधिकारियों की सीआर लिखने का अधिकार देने की मांग तेज हो गई है। अधिकारियों के बिना मंत्री को संज्ञान में लिए इतना बड़ा फैसला लेने पर मंत्री की नाराजगी होना भी सही है। ऐसे में मंत्री ने अपने तेवर दिखाने शुरु कर दिया है। इसके बाद से मंत्रियों ने सीएम से विभागीय मंत्रियों की सीआर लिखने की मांग दोबारा दोहराई है। जिस पर सरकार जल्द फैसला ले सकती है।

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