Student union election:2 साल बाद फिर चढ़ेगा कॉलेजों में चुनाव का रंग, भाजपा-कांग्रेस में होगी वर्चस्व की लड़ाई
छात्र संघ चुनाव: उच्च शिक्षा विभाग अब चुनाव कराने को तैयार
2 साल बाद उत्तराखंड के कॉलेज और महाविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव का बिगुल बजने वाला है। लंबे संघर्ष के बाद छात्र संगठनों की जीत हुई और उच्च शिक्षा विभाग अब चुनाव कराने को तैयार है। जिसके बाद अब सियासी दलों भाजपा और कांग्रेस में भी वर्चस्व की जंग शुरू हो जाएगी। कॉलेजों में होने वाले चुनाव में सियासी दलों की सीधी लड़ाई मानी जाती है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस इसको लेकर अभी से जंग की तैयारी में जुट गए हैं। भूख हड़ताल कर चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने को एनएसयूआई और कांग्रेस नेता अपनी जीत मानकर चल रहे हैं।

एनएसयूआई अपनी जीत मानकर चल रही
छात्रों के विरोध और भूख हड़ताल में जहां एनएसयूआई समेत कई संगठनों ने हिस्सा लिया, उसको कांग्रेस अपनी जीत मानकर चल रही है। हालांकि भाजपा का छात्र संगठन माने जाने वाले एबीवीपी इस लड़ाई में नजर नहीं आए।जिस तरह से दो साल में कई बार छात्रों ने चुनाव कराने की मांग की और इसका जमकर विरोध भी हुआ, उसमें भाजपा सरकार की किरकिरी भी हुई है। उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत को लेकर कई बार छात्रों ने जमकर विरोध प्रदर्शन भी किया। जो कि कहीं न कहीं सरकार के खिलाफ गया। इस बीच छात्रों के आंदोलन के बीच में जब भी भाजपा के मेयर और नेता छात्रों के बीच जाने की कोशिश करते नजर आए तब भी उन्हें छात्रों के विरोध का सामना करना पड़ा। ऐसे में भाजपा के लिए छात्र संघ चुनाव एक बार फिर बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
डीएवी कॉलेज छात्र संघ चुनाव में सियासी दलों की जंग
उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी देहरादून में सबसे बड़े कॉलेज डीएवी कॉलेज छात्र संघ चुनाव में जिस तरह हर बार सियासी दलों की जंग देखने को मिलती है। उसमें इस आंदोलन का असर भी जरूर देखने को मिलेगी। उत्तराखंड में 30 नवंबर से छात्र संघ चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। इस बीच प्रदेश में छात्र संघ चुनाव कराने का रास्ता भी खुल गया है। उत्तराखंड में सबकी नजर छात्र संघ चुनाव में डीएवी कॉलेज पर ही रहती है। जो कि छात्र राजनीति का अड्डा माना जाता है। डीएवी में एबीवीपी और एनएसयूआई के बीच ही प्रमुख जंग देखने को मिलती है। लेकिन लंबे समय से एबीवीपी से अलग हुए गुट के ही प्रत्याशी जीतते आ रहे हैं। ऐसे में इस बार एबीवीपी के सामने करो या मरो वाली स्थिति है। इस चुनाव से भाजपा की भी सीधी प्रतिष्ठा जुड़ी हुई मानी जा रही है। इस बीच बीते कई दिनों से एनएसयूआई डीएवी में सक्रिय नजर आ रही है। जिस तरह से चुनाव कराने को लेकर एनएसयूआई ने भूख हड़ताल में अहम भूमिका निभाई उसके बाद एनएसयूआई और कांग्रेस के सीनियर नेता इसे अपने छात्र संगठन की जीत बता रहे हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व सीएम हरीश रावत ने सोशल मीडिया में अपने छात्र नेताओ को बधाई दी है।
एबीवीपी, एनएसयूआई और बागी गुट के लिए ये चुनाव काफी अहम
छात्र राजनीति का सबसे बड़ा अड्डा माने जाने वाले डीएवी कॉलेज में अब तक 13 बार एनएसयूआई को हार का मुंह देखना पड़ा है। 2018 तक 12 बार एबीवीपी तो 2019 में हुए छात्र संघ चुनाव में एक बार एबीवीपी से बगावत कर पूर्व अध्यक्षों के समर्थित निर्दलीय लड़ने वाले निखिल शर्मा डीएवी के अध्यक्ष रहे। निखिल के अध्यक्ष कार्यकाल के बाद अब तक चुनाव नहीं हुआ। ऐसे में इस बार एबीवीपी, एनएसयूआई और बागी गुट के लिए ये चुनाव काफी अहम माना जा रहा है। ऐसे में छात्र नेताओ को छात्र संघ चुनाव की तारीखों का इंतजार है। जिसके बाद डीएवी पूरी तरह से चुनावी रंग में नजर आने लगेगा।












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