33 साल की थारू जन जाति की पहली लोक गायिका रिंकू राणा, होली के दिन हादसे में मौत, जानिए कैसे बनाई थी खास पहचान

Rinku Rana Tharu tribe first folk singer died होली खेलकर मायके से लौट रही थारू जन जाति की प्रथम लोक गायिका रिंकू राणा की सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई। तेज गति से आ रहा ईंटों से ओवर लोड ट्रैक्टर ट्रॉली ने उनको टक्कर मार दी। हादसे के बाद ट्रैक्टर ट्रॉली चालक मौके से भाग गया।

आस-पास के लोगों ने घायल रिंकू राणा को उप जिला अस्पताल सितारगंज पहुंचाया। जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जिसकी चपेट में आने से उनकी मौत हो गई। घटना के बाद से परिवार में कोहराम मचा हुआ है।लोकगायिका रिंकू राणा ने अपने गीतों के माध्यम से थारू समाज की परंपराओं और संस्कृति को व्यापक पहचान दिलाई है।

Rinku Rana 33-year-old Tharu tribe first folk singer died accident Holi how she established identity

थारू जनजाति समाज में रिंकू राणा अपनी मधुर आवाज के लिए जानी जाती थीं। खासकर होली पर्व पर उनके गीतों से कार्यक्रमों में अलग ही रंग जम जाता था। बताया जा रहा है कि लोक गायिका रिंकू राणा ने दुर्घटना से एक दिन पहले ही अपना नया सॉन्ग लॉन्च किया था, जिसे एक ही दिन में करीब 400 लाइक मिल चुके थे। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में उनकी पहचान थी।

उत्तराखंड में नौगजा, कल्याणपुर निवासी जनजाति की प्रसिद्ध लोक गायिका 33 साल की रिंकू राणा होली खेलने स्कूटी से अपने मायके गांव बिचपुरी खैरना सितारगंज गई थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार लौटते समय वह सड़क किनारे स्कूटी खड़ी कर किसी से बात कर रही थी। उस समय रिंकू के साथ उनकी भतीजी जिया राणा भी थी। तभी तेज गति से आ रहा ईंटों से ओवर लोड ट्रैक्टर ट्रॉली चालक ने उनको टक्कर मार दी।

हादसे के बाद ट्रैक्टर ट्रॉली चालक मौके से भाग गया। आस-पास के लोगों ने घायल रिंकू राणा को उप जिला अस्पताल सितारगंज पहुंचाया। जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनकी भतीजी की हालत सामान्य है। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त स्कूटी व ट्रैक्टर ट्रॉली अपने कब्जे में ले लिया। रिंकू का एक बेटा है, जो चौथी कक्षा में पढ़ता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने थारू जनजाति की प्रसिद्ध लोकगायिका रिंकू राणा का सड़क दुर्घटना में असामयिक निधन होने पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने अपने शोक सन्देश में कहा कि लोकसंस्कृति और लोकसंगीत के संरक्षण में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। हाल ही में होली मिलन कार्यक्रमों में उन्होंने कई स्थानों पर अपनी प्रस्तुति दी थी। उनके असमय निधन से जनजाति समाज को बड़ी क्षति हुई है।

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