Raksha bandhan 2023: गुजरात के भाइयों की कलाई पर बंधेगी उत्तरकाशी की 'गंगा डॉल', जानिए क्यों खास है ये राखी

एक अनोखा प्रयोग उत्तरकाशी की स्वयंसेवी सहायता समूह कर रहे हैं जिन्होंने ऊन से एक स्पेशल रा​खी तैयार की है, इन राखियों का नाम दिया गया है गंगा डॉल।

रक्षाबंधन त्यौहार को लेकर लोगों में इस बार जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। जिसमें सबसे ज्यादा आकर्षण इस बार लोकल फॉर वोकल उत्पाद में देखने को मिल रहा है। उत्तराखंड में भी स्थानीय स्वयं सहायता समूह की महिलाएं लगातार अभिनव प्रयोग कर रहे हैं।

Raksha bandhan 2023: Ganga Doll of Uttarkashi will be tied on the wrist of the brothers of Gujarat, know why this Rakhi is special

इनमें नए नए तरीकों से लोकल उत्पादों से राखियां तैयार की जा रही है। कोई पिरुल से राखी तैयार कर रहे हैं तो कोई कॉटन से बनी लोकल राखियों को बाजार में बेच रहे हैं। ऐसा ही एक अनोखा प्रयोग उत्तरकाशी की स्वयंसेवी सहायता समूह कर रहे हैं जिन्होंने ऊन से एक स्पेशल रा​खी तैयार की है, इन राखियों का नाम दिया गया है गंगा डॉल।

उत्तरकाशी के भटवाड़ी ब्लॉक की नेताला गांव की महिलाएं लंबे समय से गंगा डॉल तैयार कर रही हैं, जो कि गंगा मां का प्रतीक मानकर तैयार करवाई जा रही हैं। पहले स्थानीय लोगों की पहल पर इसे सजावट के तौर पर और मां गंगा के प्रतीक के रुप में तैयार करवाया गया। लेकिन इस बार राखी पर इसे नया स्वरुप दिया गया।

नेताला गांव की स्वयं सहायता समूह ने करीब एक माह में 50 हजार राखियां तैयार की। जिसमें 45 हजार राखी मानव उत्थान संस्था गुजरात को बेची गई हैं। इस राखी की कीमत 10 रुपए रखी गई है। स्वयं सहायता समूह की 16 महिलाओं ने गंगा डॉल नाम से राखी तैयार की। जिसमें ऊन से बुलाई व कढ़ाई की गई। राखी को एक डॉल का रूप दिया गया। गुजरात की मानव उत्थान संस्थान ने महिलाओं को राखी बनाने ऑर्डर दिया।

इसके साथ ही समूह की महिलाओं ने पांच हजार गंगा डॉल राखी को ''मुख्यमंत्री सशक्तीकरण योजना'' के अंतर्गत स्टाल पर रखा। जहां से राखी बेची जा रही हैं। इस नए प्रयोग को स्थानीय लोगों ने काफी सराहना की है। इससे पहले साल 2014 में गंगा भागीरथी महिला स्वरोजगार संस्था नेताला की 6 महिलाओं ने मिलकर गंगा डॉल तैयार की थी। जो तब से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। इन महिलाओं ने गंगा डॉल को गुजरात की डिमांड पर ही बनाया था। जो कि गांव में होने वाले कार्यक्रमों में अतिथियों को गंगा डॉल पहनाकर स्वागत और सम्मान करते हैं। अब रक्षाबंधन पर इसके स्वरूप को राखी के रूप में तैयार करवाया गया है। जो क गुजरात में लोेगों की कलाइयों पर सजने जा रही है।

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