उत्तराखंड के निकाय चुनावों में भाजपा, कांग्रेस के बीच सियासी घमासान,बागी के साथ ही जानिए क्यों हो रहा विवाद
उत्तराखंड के निकाय चुनावों में भाजपा, कांग्रेस के बीच सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले बागियों के चुनाव लड़ने से सियासी दलों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है, दूसरी तरफ नामांकन निरस्तीकरण को लेकर सियासत तेज हो गई है।
नामांकन निरस्तीकरण को लेकर अब भाजपा, कांग्रेस आमने सामने आ गई है। भाजपा ने निकायों में नामांकन निरस्तीकरण के कांग्रेसी आरोपों को उनकी चुनावों में प्रत्यक्ष दिख रही हार से उपजी हताशा बताया है। प्रदेश प्रवक्ता सुरेश जोशी ने कहा कि कांग्रेस सिर्फ चुनावों में आधी अधूरी और गलत जानकारी के साथ सक्रिय होती है।

वहीं कांग्रेस के बड़े नेता भी उम्मीदवारों के चयन में लेनदेन, गुटबाजी, गड़बड़ी और अयोग्यता के गंभीर आरोप लगा चुके हैं। लिहाजा नतीजे सामने है, उनके प्रत्याशियों के नामांकन का त्रुटिपूर्ण मिल रहे हैं। उन्होंने नामांकन निरस्तीकरण के अंतर को दोनों पार्टियों की कार्यशैलियों का अंतर बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा 24X7 की पार्टी है और हमेशा जनता के बीच सक्रिय रहते हैं। जब जब चुनाव आयोग मतदाता सूचियों या मतदाता बनाने का अभियान चलाता है, तब हमारे कार्यकर्ता जनता के मध्य कार्य करते हैं।
ऐसे में यदि कोई त्रुटि उन्हें नजर आती है तो वह तत्काल सुधार की प्रक्रिया अपनाते हैं। लेकिन दूसरी तरफ कांग्रेस के लोग सिर्फ ऐन चुनाव के अवसर पर ही होश संभालते हैं। उन्होंने लोहाघाट के ऐसे ही प्रकरण का हवाला देते हुए कहा कि जहां उनके प्रत्याशी गिरधर सिंह नामांकन करने पहुंचे तो मालूम हुआ उनका नाम ही मतदाता सूची में नहीं था।
ऐसे में गलती किसकी हो सकती है, जबकि होना तो यह चाहिए कि तमाम चुनाव आयोग के मतदाता कार्यक्रमों में कांग्रेसियों को अपना ही नहीं बल्कि जनता के सहयोग के लिए भी आगे रहना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में ही भ्रष्टाचारी, अपराधी, अवैधानिक, अनैतिक कार्यों में लिप्त लोगों की बहुतायत है। लिहाजा बड़ी संख्या में टिकट ऐसे ही अयोग्य और अवैध व्यक्तियों को दिए जाते हैं जिनकी नामांकन में दी गई जानकारी गलत पाई जाती है।












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