पहले पार्वती कुंड अब जागेश्वर में भोले की विशेष पूजा, शिव भक्त PM modi ने देवभूमि से दिया खास संदेश

पिथौरागढ़ में पार्वती कुंड में विशेष पूजा अर्चना करने के बाद शिव भक्त पीएम मोदी अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम में भी शिव ​भक्ती में लीन नजर आए। जागेश्वर धाम में मोदी ने विशेष पूजा अर्चना की। पूजा के बाद पीएम मोदी ने शिव की आरती की और पुजारियों से आशीर्वाद भी लिया। इसके बाद मोदी ने धाम में परिक्रमा भी की। इस बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मोदी को जागेश्वर धाम में एक खास भेंट दी और पीएम को विशेष कलाकृति भी सौंपी।

Parvati Kund special worship Bhole Jageshwar, Shiv devotee PM Modi gave special message

उत्तराखंड के मुख्य सचिव एसएस संधू ने पीएम मोदी को जागेश्वर धाम के इतिहास और यहां की खास परंपरा के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी। मंदिर परिसर में ही कुछ फोटो प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। जिसका पीएम ने अवलोकन किया। जागेश्वर धाम में कुछ देर आराम करने के बाद अब पीएम मोदी दोबारा पिथौरागढ़ के लिए रवाना होंगे। यहां पीएम मोदी जनसभा को संबोधित करेंगे और उत्तराखंड को कई योजनाओं की सौगात देंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज एक दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड में हैं। पीएम मोदी सुबह सबसे पहले पिथौरागढ़ के जोलिंगकोंग पहुंचे। यहां पर पीएम मोदी ने पार्वती कुंड में विशेष पूजा अर्चना की। हिंदू पौराणिक मान्यता है कि शिव पार्वती का जब विवाह हुआ तो यहीं पार्वती जी ने स्नान किया और फिर कैलाश की तरफ बढ़ गए। यहां से कैलाश सामने दिखता है।

कैलाश के पास भी एक गौरीकुंड है। ऐसे में इस जगह का विशेष महत्व है। सिर पर पगड़ी और हाथ में डमरु लिए शिव भक्त मोदी भोले के रंग में रंगे हुए नजर आए। इस बीच पीएम मोदी ने आदि कैलाश के दर्शन भी किए और काफी देर तक साधना भी की। पीएम मोदी ने यहां मंदिर की परिक्रमा भी की। आदि कैलाश पहुंचने वाले पीएम मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं। यहां काफी देर तक मोदी भक्ति में रंगे नजर आए। साथ ही स्थानीय वेश भूषा पहने हुए नजर आए।

मंदिर के पुजारी के साथ पीएम मोदी ने मंत्रोच्चारण किया और शंख भी बजाया। इस दौरान उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे। माना जा रहा है कि सरकार आदि कैलाश यात्रा को नए आयाम देना चाहती है। पीएम मोदी के दौरे से इसे पुर्नजीवित कर कैलाश मानसरोवर यात्रा को भारत के पर्यटन से जोड़ने की कोशिश शुरू की गई है। जहां से पहले यात्री कैलाश की यात्रा करते थे, उसे ही दोबारा संचालन की तैयारी है। जागेश्वर धाम में भी पीएम मोदी ने भोले नाथ की विशेष पूजा और आरती की।

जागेश्वर धाम को राज्य सरकार मानसखंड यात्रा मिशन से जोड़कर एक नया आयाम ​स्थापित करना चाहती है। सरकार की कोशिश है कि गढ़वाल के चार धाम की तरह कुंमाउ की मानसखंड यात्रा को विश्व के मानचित्र पर प्रसिद्धि मिल जाए। जिससे पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिल सके। जागेश्वर धाम का भी अपना पौराणिक इतिहास और मान्यता है।

जागेश्वर धाम को भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। अल्मोड़ा जनपद से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित जागेश्वर धाम में लगभग ढाई सौ छोटे-बड़े मंदिरों का समूह है। इनमें से एक ही स्थान पर छोटे-बड़े 224 मंदिर हैं। 125 छोटे-बड़े मंदिरों के समूह में 108 शिवलिंग और 17 अन्य देवी देवताओं के मंदिर स्थित है।

यह मंदिर लगभग ढाई हजार वर्ष पुराना है। मान्यता है कि यह प्रथम मंदिर है, जहां लिंग के रूप में शिव पूजन की परंपरा सबसे पहले शुरू हुई थी। इस मंदिर में भगवान शिव के साथ विष्णु, देवी शक्ति और सूर्य देवता की पूजा की जाती है। जागेश्वर धाम को पुराणों में हाटकेश्वर के नाम से जाना जाता है। पुराणों के अनुसार भगवान भोलेनाथ और सप्त ऋषियों ने यहां पर तपस्या की थी।

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