'5 Min में मर जाऊंगा' – धीरेंद्र शास्त्री की कथा सुनकर लौटे, पड़ोसी के सामने दम तोड़ने वाले प्रवीण मित्तल कौन?
Panchkula Death Case News: 'मैं जहर खा चुका हूं... अब सिर्फ 5 मिनट का मेहमान हूं...' इतना कहकर कार से लड़खड़ाते हुए बाहर निकला एक व्यक्ति, और चंद पलों में उसने दम तोड़ दिया। आसपास खड़े लोगों के चेहरों पर डर, हैरानी और अफसोस था। यह कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि हरियाणा के पंचकूला में घटी एक हिला देने वाली सच्ची वारदात थी, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया है। कार के भीतर मौत थी, बाहर खड़ा था रहस्य...
दरअसल, पंचकूला के सेक्टर-27 में एक कार खड़ी थी - बेहद साधारण, लेकिन उसके अंदर कुछ ऐसा था, जो देखने वालों की रूह कंपा दे। कार में एक ही परिवार के सात लोगों के शव - दो बुजुर्ग, एक कपल और उनके तीन मासूम बच्चे। सभी के मुंह से झाग निकल रहा था, उल्टियां फैली थीं, और आंखों में स्थायी खौफ की परछाई थी। इस परिवार ने आत्महत्या की थी।

मरने से पहले बोला - 'मैं भी जहर खा चुका हूं...'
पड़ोस में रहने वाले पुनीत राणा को सबसे पहले शक हुआ। एक कार कई घंटों से उनके घर के बाहर खड़ी थी। जब वह पास गए, तो कार की हालत देखकर पैरों तले जमीन खिसक गई। अंदर मौजूद लोगों पर उल्टी फैली थी और कोई हरकत नहीं कर रहा था। तभी कार से एक शख्स लड़खड़ाता हुआ निकला - उसका नाम था प्रवीण मित्तल।
'मैं भी जहर खा चुका हूं... मैं 5 मिनट में मर जाऊंगा... हम सब खत्म हो चुके हैं...' यह प्रवीण के आखिरी शब्द थे। पुनीत के मुताबिक, उन्होंने पानी देने की कोशिश की, मदद के लिए चिल्लाया, पुलिस बुलाई। पुलिस कुछ ही मिनटों में पहुंच गई, लेकिन एम्बुलेंस को आने में 45 मिनट लग गए। तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
बागेश्वर धाम से लौटते हुए मौत की यात्रा!
इस कहानी का एक और चौंकाने वाला पहलू है - बाबा धीरेंद्र शास्त्री की कथा। दरअसल, देहरादून निवासी प्रवीण मित्तल अपने परिवार के साथ बागेश्वर धाम के कथा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पंचकूला आए थे। कथित तौर पर यह घटना धीरेंद्र शास्त्री की कथा में शामिल होकर लौटने के बाद हुई।
आखिरी यात्रा... आध्यात्मिक कथा से लौटते हुए... और अंत में आत्महत्या!
सुसाइड नोट: 'मैं बैंकरप्ट हो चुका हूं'
पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें प्रवीण मित्तल ने साफ तौर पर लिखा- 'मैं पूरी तरह बैंकरप्ट हो चुका हूं। अब जीने का कोई रास्ता नहीं बचा।' सुसाइड नोट में कुछ लोगों के नाम भी हैं, जिनसे कथित तौर पर उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ था। पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है।
कौन थे प्रवीण मित्तल और उनका परिवार?
- प्रवीण मित्तल (42) - देहरादून निवासी, ट्रैवल एजेंसी चलाते थे।
- रीना मित्तल (पत्नी)
- देशराज मित्तल (पिता)
- विमला देवी (मां)
- हार्दिक (14), दलिशा (11), हिमशिखा (11) - तीन मासूम बच्चे
कर्ज के बोझ, व्यापार में घाटे और आर्थिक तबाही ने एक पूरा परिवार निगल लिया।
क्या है पुलिस की थ्योरी?
एसडीपीओ हिमाद्री कौशिक के मुताबिक, प्रथम दृष्टया यह मामला सामूहिक आत्महत्या का है। फोरेंसिक टीम साक्ष्य जुटा रही है। सुसाइड नोट और जहर के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।
खड़े हो रहे 3 बड़े सवाल?
क्या बाबा की कथा का मानसिक असर पड़ा?
- हालांकि, इसका कोई सीधा प्रमाण नहीं है, लेकिन यह जरूर देखा गया है कि कई लोग 'चमत्कारी समाधान' की उम्मीद में आध्यात्मिक जगहों की ओर रुख करते हैं।
क्या कर्ज का बोझ इतना बड़ा था कि पूरा परिवार खत्म हो गया?
- सुसाइड नोट से यही संकेत मिलते हैं।
अगर एमर्जेंसी सेवाएं समय पर पहुंचतीं, तो क्या जान बच सकती थी?
- स्थानीय लोगों के मुताबिक, पुलिस तो तुरंत आई लेकिन एम्बुलेंस की देरी ने उम्मीद खत्म कर दी।
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