पहाड़ी स्ट्रीट फूड बूढ़ दादी: देहरादून में चाइनीज और स्ट्रीट फूड को टक्कर दे रहे ठेठ पहाड़ी पकवान
देहरादून में पहाड़ी स्ट्रीट फूड बूढ़ दादी में पहाड़ी लोगों के साथ युवा पीढ़ी भी ठेठ पहाड़ी व्यंजनों को काफी पसंद कर रहे हैं। चाइनीज और दूसरे स्ट्रीट फूड को टक्कर देने के लिए पहाड़ी स्ट्रीट फूड का कॉन्सेप्ट लाया गया है।

देहरादून में चाइनीज और दूसरे स्ट्रीट फूड को टक्कर देने के लिए पहाड़ी स्ट्रीट फूड का कॉन्सेप्ट लोगों को पसंद आ रहा है। जो कि अब धीरे-धीरे कई कार्यक्रमों की शान बनता जा रहा है। पहाड़ी उत्पादों से बने पहाड़ी व्यंजन की तरफ लोगों के रूझान को बढ़ाने के लिए पौड़ी के दंपत्ति कपिल डोभाल और दीपिका डोभाल ने देहरादून में इसको आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है।
कौदा झंगोरा खाएंगे उत्तराखंड राज्य बनाएंगे
देहरादून में पहाड़ी स्ट्रीट फूड बूढ़ दादी में अब पहाड़ी लोगों के साथ युवा पीढ़ी भी ठेठ पहाड़ी व्यंजनों को काफी पसंद कर रहे हैं। अपने पहाड़ी कॉन्सेप्ट पर काम कर रहे कपिल डोभाल ने बताया कि 24 नवंबर 2021 से वे कोशिश कर रहे हैं कि अपने उत्तराखंड राज्य की मूल अवधारणा को हम सब याद रखें। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन में हमारा नारा था कि कौदा झंगोरा खाएंगे उत्तराखंड राज्य बनाएंगे। जो कि राज्य बनने के बाद से कहीं गायब सा हो गया।
पत्नी दीपिका ने पूरे कॉन्सेप्ट की बागडोर अपने हाथ में संभाली
उत्तराखंड के पहाड़ी उत्पादों और व्यंजनों को लोगों की जुबां पर लाने के लिए कपिल डोभाल ने शुरूआत करने का मन बनाया लेकिन इस काम के लिए किसी का साथ चाहिए था, जब कपिल को किसी का सहारा नहीं मिल रहा था तो उनकी पत्नी दीपिका ने पूरे कॉन्सेप्ट की बागडोर अपने हाथ में संभाल ली। दीपिका मूल रुप से उत्तराखंड की रहने वाली हैं लेकिन राजस्थान में पढ़ी लिखी और वहां की संस्कृति देखकर उनके मन में भी ये बात आई कि हमें अपनी संस्कृति को नहीं भूलना है। यही देखते हुए उन्होंने अपने पति का साथ दिया और स्ट्रीट फूड के लिए पहाड़ी व्यंजनों को बनाना शुरू किया जिसे आज लोग काफी पसंद कर रहे हैं।
गढ़वाली व्यंजनों को ऑर्गेनिक उत्पाद के रूप में परोस रहे
वे बताती हैं कि मोमो, चाउमीन, थुप्पा जैसे फास्ट फूड का तोड़ निकालते हुए गढ़वाली व्यंजनों को नए और शुद्ध ऑर्गेनिक उत्पाद के रूप में परोसने में जुटे हैं। बूढ़ी दादी स्ट्रीट फूड जंक्शन में पहाड़ी व्यंजन ढुंगला, ढिंढका, गिंवली, जवलि, घीन्जा, सिडकु, बेडु रोटी, सोना आलू, करकरा पैतुड़, द्युडा, बदलपुर की बिरंजी, बडील, ल्याटू, पतुड़ी, टपटपि चा, पिट्ठलू, चर्चरी बर्बरी चटनी, बारहनाजा खाजा, चुनालि, घुमका व मुंगरेडी इत्यादि बनाए जाते हैं। जो कि हरिद्वार रोड जोगीवाला में है। खास बात ये है कि पहाड़ी व्यंजन जिन नामें से पहाड़ों में पुकारे जाते हैं, दुकान और किसी भी कार्यक्रम में जहां परोसे जाते हैं, वहां इन्हीं परंपरागत नामों से डिस्प्ले किया जाता है।












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