उत्तराखंड में निकाय के बाद पंचायत भी प्रशासकों के हवाले, उठने लगे कई सवाल, जानिए कहां फंसा पेंच
उत्तराखंड में निकाय के बाद अब पंचायत भी प्रशासकों के हवाले हो गई है। पंचायत चुनाव कब होंगे इसको लेकर फिलहाल कोई बयान नहीं आया है। लेकिन निकाय चुनाव को सरकार ने 25 दिसंबर तक कराने की बात की है। जो कि वर्तमान स्थिति में संभव नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में नए साल में ही निकाय और पंचायत चुनाव हो पाएंगे। वो भी एक साथ हों, ये भी संभव नहीं है।
उत्तराखंड में निकाय चुनावों की तारीख ओबीसी आरक्षण का निर्धारण न होने के कारण 25 दिसंबर तक संभव नहीं दिख रहे हैं। अभी तक नगर निकायों में ओबीसी आरक्षण का निर्धारण नहीं हो पाया है और कहा जा रहा है कि इसमें कुछ और वक्त लगेगा।

उत्तराखंड में नगर निकायों की संख्या 105 है, जिनमें से बदरीनाथ, केदारनाथ व गंगोत्री में चुनाव नहीं होते। शेष 102 निकायों में चुनाव के दृष्टिगत परिसीमन, निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण और मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण कार्य हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार निकायों में ओबीसी के लिए आरक्षण का नए सिरे से निर्धारण होना है। इस संबंध में गठित एकल समर्पित आयोग अपनी रिपोर्ट भी शासन को सौंप चुका है।
ओबीसी आरक्षण निर्धारण के सिलसिले में पूर्व में सरकार ने अध्यादेश के जरिये निकाय अधिनियम में संशोधन किया था। जब यह अध्यादेश विधेयक के रूप में विधानसभा के सत्र में रखा गया तो नगर निगम अधिनियम पारित नहीं हो पाया था। फिर यह प्रकरण विधानसभा की प्रवर समिति को सौंप दिया गया। प्रवर समिति ने इस विषय पर अध्ययन जारी रखने के साथ ही संस्तुति की कि वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर निकाय चुनाव कराए जाएं।
सरकार ने ओबीसी आरक्षण निर्धारण के दृष्टिगत फिर से निकाय अधिनियम में संशोधन अध्यादेश राजभवन भेजा। राजभवन से मंजूरी के बाद ही आरक्षण नियमावली में भी संशोधन होना है। इसके बाद जो प्रक्रिया होगी उसमें कब से कम 15 दिसंबर तक का समय लग सकता है।
ऐसे में चुनाव जनवरी या फरवरी तक खिसक सकते हैं। जहां तक पंचायत चुनावों की बात है तो वे निकाय चुनावों के साथ कराना संभव नजर नहीं आ रहा है। हरिद्वार को छोड़कर 12 जिलों में पंचायत चुनाव होने हैं। जो कि निकाय के बाद ही संभव है। पंचायत चुनाव भी 6 माह के अंदर सरकार को कराना है।
एसडीसी फाउंडेशन के संस्थापक और समाजसेवी अनूप नौटियाल का कहना है कि सरकार कब तक लोकतंत्र की व्यवस्था को वेंटिलेफ्टर पर रखना चाहती है। आम लोगों और जनता के कामों के लिए जनप्रतिनिधियों का होना आवश्यक है। लेकिन सरकार लंबे समय से इनको टाल रही है। अब पंचायत के चुनाव भी समय पर होना मुश्किल है। लोकतंत्र में हर किसी की अपनी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए इनके चुनाव समय पर कराएं।












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