Nag Panchami 2025: उत्तराखंड में नाग धाम और मंदिरों का रहस्य, काल सर्प दोष से यहां मिलती है मुक्ति
Nag Panchami 2025: 29 जुलाई मंगलवार को नाग पंचमी है। उत्तराखंड में चार धाम के साथ ही नाग धाम भी है। जहां कई प्रसिद्ध नाग देवता के मंदिर हैं। उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ को नागों की भूमि भी कहा जाता है। नाग मंदिरों में नाग पंचमी को विशेष पूजा अर्चना की जाती है।
हिंदूओं में नाग देवता की लेकर गहरी आस्था होती है। खासकर जिनके कुंडली में नाग सर्प दोष होता है, वो लोग नाग पंचमी को विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन नाग मंदिर में दूध और खीर चढ़ाने की परंपरा है। नाग धामों और मंदिरों में नाग पंचमी पर मेला भी लगता है। जहां पर देव डोलियों का संगम होता है।

सेम मुखेम प्रसिद्ध नागतीर्थ -उत्तराखंड में पांचवे धाम के रूप में विख्यात है। ये टिहरी गढ़वाल जिले में आता है। नाग धाम को सेम नागराजा के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि द्वारिका डुबने के बाद श्री कृष्ण यहां नागराज के रूप मे प्रकट हुए थे। मंदिर में नागराज फन फैलाये हैं और भगवान कृष्ण नागराज के फन के ऊपर वंशी की धुन में लीन हैं।
उत्तरकाशी जिले में कई जगहों पर नाग धाम- नाग के 9 स्वरुप होते हैं, अनंत, वासुकी, शेष, पद्मनाभ, कंबल, शंखपाल, घृतराष्ट्र, तक्षक, कालिया। उत्तरकाशी जिले में इन सब रुप में नाग के मंदिर मौजूद हैं। गोरशाली गांव में वासुकी नाग का प्राचीन मंदिर हैं। जो कि उत्तरकाशी के भटवाड़ी से करीब 8 किमी दूर है।वासुकी नाग का प्राचीन मंदिर करीब 250 सालों से भी पुराना है। मंदिर के पास बना कुंड लोगों के लिए रहस्य बना हुआ है। मान्यता है कि इस कुंड में दूध की धारा डालने पर देवरूप में नाग स्वयं आते हैं। जिस पर स्थानीय लोग नाग पंचमी पर अपनी गाय का पहला दूध नाग देवता को चढाने आते हैं। नाग पंचमी को यहां विशेष पूजा अर्चना होती है।
शेषनाग देवता मंदिर -उत्तरकाशी बड़कोट तहसील के कुपड़ा गांव में है। मंदिर यमुना घाटी के स्यानाचट्टी से 6 किमी वाहन द्वारा और लगभग 3 किलोमीटर पैदल चलने के बाद पहुंचते हैं। यह मंदिर सुंदर वास्तुकला का उदाहरण पेश करता है। यहां नागपंचमी को भक्ति और श्रद्धा का अगाध सैलाब उमड़ता है। पंचमी के दिन नागपंचमी पर्व के उपलक्ष में भव्य मेले का आयोजन होता है। देवडोलियों के साथ लोकनृत्य तांदी की धूम रहती है। गांव के साथ साथ बाहर के लोग भी यहाँ मेले में हर्षोउल्लास से भाग लेते हैं। मेले में दूध दही की होली खेली जाती है।
पिथौरागढ़ नागों की भूमि - पिथौरागढ़ से 87 किलोमीटर दूर बेरीनाग तहसील है, यहां बेणीनाग मंदिर है, जहां नाग देवता की पूजा की जाती है और इसी के नाम पर इस जगह का नाम बेरीनाग पड़ा। यहां पर नागों के अलग-अलग मंदिर हैं। इन प्रमुख मंदिरों में बेरीनाग, धौली नाग, फेणी नाग, पिंगली नाग, काली नाग और सुंदरी नाग मंदिर है। यहां तक कि कुछ पहाड़ों का नाम भी नागों के नाम पर रखा गया है। ये नाग मंदिर आज इस क्षेत्र के लोगों के ईष्ट देवताओं के मंदिर हैं। इन क्षेत्रों में सिर्फ नाग के मंदिर हैं।












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