जीरो टॉलरेंस की सरकार के खिलाफ कांग्रेस का चुनावी हथियार बनेगा लोकायुक्त
लोकायुक्त को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने सामने
देहरादून, 1 अक्टूबर। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर लोकायुक्त का मामला गर्मा गया है। कांग्रेस ने चुनावी साल में जीरो टॉलरेंस की सरकार पर लोकायुक्त के मामले को ठंडे बस्ते में डालने का आरोप लगाया है। कांग्रेस अब चुनावी साल में लोकायुक्त को चुनावी मुद्दा बनाने का ऐलान कर चुकी है।

100 दिन में मजबूत लोकायुक्त देने का किया था वादा
सत्ताधारी भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव के दृष्टि पत्र में 100 दिन में राज्य को मजबूत लोकायुक्त देने का वादा किया था। लेकिन सरकार साढ़े चार साल बाद 3 मुख्यमंत्रियों को बदलकर भी लोकायुक्त नहीं बना सकी। अब कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर विधानसभा चुनाव में जा रही है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार में लोकायुक्त बिल विधानसभा के पटल पर आया और प्रवर समिति के पास जाने के बाद आज तक नहीं लौट पाया है। कांग्रेस सवाल उठा रहा है कि आखिर बिल कहां गायब हो गया? कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर अब विधानसभा चुनाव में जा रही है। चुनाव में भजापा के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के खिलाफ कांग्रेस इस मुद्दे को चुनावी हथियार बनाएगी।
भाजपा का दावा अधिकतर घोषणाएं हो चुकी है पूरी
2022 के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने घोषणा पत्र की समिति भी बना दी है। जिसकी जिम्मेदारी पूर्व सीएम और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक को सौंपी गई है। भाजपा सरकार का दावा है कि पार्टी के दृष्टि पत्र (घोषणा पत्र) की 80 से 85 प्रतिशत वादे पूरे किए जा चुके हैं और बाकी अगले दो-तीन महीनों में पूरे हो जाएंगे। लेकिन लोकायुक्त को लेकर पार्टी के पास फिलहाल कोई जबाव नहीं है।
साल 2011 में लाया गया था बिल
उत्तराखंड में पहली बार लोकायुक्त अधिनियम वर्ष 2011 में तत्कालीन सीएम भुवन चंद्र खंडूरी के कार्यकाल में पेश किया गया था। उस वक्त इस अधिनियम को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मंजूरी भी मिल गई थी, लेकिन बाद में सीएम बने विजय बहुगुणा ने इसे निरस्त कर दिया गया था। साल 2017 में त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने इसे दोबारा विधानसभा में पेश किया था, जिसे बाद में प्रवर समिति को भेज दिया गया।
कांग्रेस का आरोप, भ्रष्ट्राचार के डर से नहीं लाया लोकायुक्त
कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ आरपी रतूड़ी पार्टी का कहना है कि चुनाव में राज्य को 100 दिन में मजबूत लोकायुक्त देने का वादा किया था। सरकार विधानसभा में विधेयक लाई। सदन में विपक्ष ने बिल का समर्थन किया लेकिन सत्ता पक्ष की ओर से ही विधेयक प्रवर समिति को भेज दिया गया। तब से लोकायुक्त विधेयक प्रवर समिति के पास है। इस बीच विस के तमाम सत्र आए और चले गए, लेकिन विधेयक प्रवर समिति से सदन पटल पर पेश नही हो सका। भाजपा ने भ्रष्ट्राचार के डर से लोकायुक्त नहीं लायाा सरकार को डर है कहीं लोकायुक्त बनाकर उनके भ्रष्ट्राचार पर अंकुश न लगेा आरपी रतूडी ने जीरो टॉलरेंंस की परिभाषा भाजपा सरकार के लिए जीरो बढाकर टोलरेंस करने वाली सरकार करार दिया हैा
कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ आरपी रतूड़ी का कहना है कि
भाजपा ने 100 दिन में लोकायुक्त लाने का वादा किया था, लेकिन भ्रष्ट्राचार की पोल न खुले इसलिए लोकायुक्त को नहीं लाए। यह सरकार जीरो टॉलरेंस नहीं जीरो बढ़ाओ टॉलरेंस करेंगे की नीति पर काम करती है।












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