भू कानून और मूल निवास का मुद्दा गरमाया, केदारनाथ में होगी स्वाभिमान महारैली,धामी सरकार से कर दी ये बड़ी मांगे

उत्तराखंड में भू कानून और मूल निवास को लेकर एक बार फिर मुद्दा गरमाने लगा है। मूल निवास, भू-कानून संघर्ष समिति ने पहले केदारनाथ में स्वाभिमान महारैली आयोजित करने का ऐलान किया है। इसके बाद हरिद्वार, पिथौरागढ़, रामनगर, पौड़ी, विकासनगर सहित अन्य हिस्सों में स्वाभिमान महारैलियाँ आयोजित करने की घोषणा की है। जिससे सियासत गरमानी तय है।

मूल निवास, भू-कानून संघर्ष समिति ने समीक्षा के बाद ही मूल निवास और मजबूत भू-कानून लागू करने की मांग की है। इसके साथ ही इन्वेस्टमेंट के नाम पर दी गई जमीनों की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की सरकार से मांग की है। समिति ने मलिन बस्तियों को जमीन का मालिकाना हक न देने की पैरवी की है।

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साथ ही उद्योगों के लाभांश में जमीन मालिक की भी हो बराबर की हिस्सेदारी देने और लीज पर जमीन देने की मांग की है। देहरादून में मूल निवास, भू-कानून संघर्ष समिति ने प्रेसवार्ता के जरिए अपनी बात रखी। समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने कहा कि मूल निवास और भूमि कानून जनता की भावनाओं के अनुरूप होना चाहिए। विधानसभा में कानून पारित होने से पूर्व इसके ड्रॉफ्ट के स्वरूप को लेकर सर्वदलीय और संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के साथ सरकार को चर्चा करनी चाहिए।

कहा कि आम सहमति के बाद ही विधानसभा में मूल निवास और भू-कानून बनने चाहिए। डिमरी ने कहा कि वर्ष 2022 में भू-कानून को लेकर सुभाष कुमार की अध्यक्षता में बनी कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक होनी चाहिए। उद्योगों के नाम पर दी गई जमीनों का ब्यौरा भी सार्वजनिक होना चाहिए। स्थिति यह है कि जिस प्रयोजन के लिए जमीन दी जा रही है, वहां उस प्रयोजन के बजाय प्रोपर्टी डीलिंग का काम चल रहा है। ऐसे बहुत सारे मामले सामने आ रहे हैं। उत्तराखंड में जितने भी इन्वेस्टमेंट सम्म्मेल हो रहे हैं, वह सब जमीनों की लूट के सम्मेलन थे। इस लूट की जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला जमीनों का है। जमीनों की लूट में शामिल और भू-कानून को कमजोर करने वालों की गहन जांच भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में 30 साल से रह रहे व्यक्ति को ही घर बनाने के लिए 200 वर्ग मीटर तक जमीन मिलनी चाहिए। इसके साथ ही मलिन बस्तियों को जमीन का मालिकाना हक नहीं मिलना चाहिए। किसी भी तरह के उद्योग में जमीन के मालिक की बराबर की हिस्सेदारी होनी चाहिए और उद्योगों के लिए जमीन को दस साल की लीज पर ही दी जाय। उन्होंने कहा की प्रदेश में कृषि भूमि की खरीद पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगना चाहिए और शहरी क्षेत्रों में निकायों का विस्तार भी रुकना चाहिए।

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