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Kedarnath dham के कपाट बंद करने की प्रक्रिया शुरू,भुकुंड भैरव के कपाट बंद, जानिए केदारबाबा के कब होंगे

केदारनाथ धाम के कपाट बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। बीते मंगलवार को भगवान केदारनाथ के क्षेत्रपाल भुकुंड भैरव की पूजा-अर्चना भी बंद हो चुकी है। पौराणिक मान्यता है कि केदारनाथ से पहले भुकुंड भैरव भैरवनाथ की पूजा की जाती है।

साथ ही इनके बिना भगवान शिव का दर्शन अधूरा माना गया है। मान्यता है कि ये शीतकाल में केदारनाथ मंदिर की रखवाली करते हैं। केदारनाथ धाम के क्षेत्रपाल भगवान भुकुंड भैरव के कपाट विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं।

Kedarnath Dham process closing doors started doors of Bhukund Bhairav closed know when Kedar Baba

हिंदू धर्म की मान्‍यताओं के अनुसार, देश में जहां-जहां भगवान शिव के सिद्ध मंदिर हैं, वहां-वहां कालभैरवजी के मंदिर भी हैं। भक्‍त भगवान शिव के दर्शन के साथ भैरव जी के मंदिर में आकर सिर झुकाते हैं तब उनकी तीर्थ यात्रा पूर्ण मानी जाती है। इसी तरह केदारनाथ में भी भुकुंड भैरव भैरवनाथ का मंदिर है।

केदारनाथ का पहला रावल यहां हर साल केदारनाथ के कपाट खुलने से पहले भैरव मंदिर में पूजापाठ की जाती है। भुकुंड बाबा को केदारनाथ का पहला रावल माना जाता है। उन्‍हें यहां का क्षेत्रपाल माना जाता है। बाबा केदार की पूजा से पहले केदारनाथ भुकुंड बाबा की पूजा किए जाने का विधान है और उसके बाद विधिविधान से केदानाथ मंदिर के कपाट खोले जाते हैं।

बिना छत के स्‍थापित की गई मूर्तियां भुकुंड भैरव का यह मंदिर केदारनाथ मंदिर से आधा किमी दूर दक्षिण दिशा में स्थित है। यहां मूर्तियां बाबा भैरव की हैं जो बिना छत के स्‍थापित की गई हैं। भैरव को भगवान शिव का ही एक रूप माना जाता है।

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डाॅ. हरीश गौड़ ने बताया कि केदारनाथ मंदिर को 10 क्विंटल फूलों से सजाया गया है। महालक्ष्मी पूजन पर मंदिर परिसर में चारों तरफ दीपक जलाए जाएंगे। केदारनाथ मंदिर को दीपावली पर्व के लिए 10 क्विंटल फूलों से सजाया गया है। वहीं धाम के कपाट शीतकाल के लिए आगामी तीन नवंबर को सुबह 8.30 बजे बंद कर दिए जाएंगे।

केदारनाथ भगवान की चल-विग्रह डोली के कार्यक्रम के मुताबिक, 3 नवंबर को चल-विग्रह डोली केदारनाथ मंदिर से सुबह 8:30 बजे प्रस्थान करेगी। फिर इसके बाद रात में विश्राम के लिए रामपुर पहुंचेगी। 4 नवंबर को डोली रामपुर से सुबह प्रस्थान करेगी और फाटा, नारायकोटी से गुजरते हुए रात को विश्राम के लिए श्री विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी पहुंचेगी।

5 नवंबर को चल-विग्रह डोली श्री विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी से सुबह 8:30 बजे प्रस्थान करेगी, फिर सुबह 11:20 पर अपने शीतकालीन गद्दी स्थल पर श्री ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंचेगी। जहां अगले 6 महीने तक बाबा के दर्शन होते हैं।

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