उत्तराखंड: विधानसभा चुनाव से पहले जेपी नड्डा लेंगे क्‍लास, रिपोर्ट कार्ड और सर्वे रिपोर्ट से तय होगा भव‍िष्‍य

चुनावी विजन और विधायकों के वजन पर होगा मंथन

देहरादून,19 अगस्‍त
उत्तराखंड ​में विधानसभा चुनाव को लेकर सत्ताधारी बीजेपी चुनावी मोड़ में आ गई है। इसके लिए पार्टी ने अपने विधायकों और सरकार की रिपोर्ट तैयार करवा ली है। इसी रिपोर्ट कार्ड को लेकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा दो दिवसीय दौरे पर देहरादून आ रहे हैं। नड्डा सरकार की समीक्षा के साथ ही 2022 विधानसभा को लेकर अपनी रणनीति को फाइनल टच भी देने जा रहे हैं । इसके लिए नड्डा दो दिन तक उत्तराखंड को लेकर चिंतन और मंथन भी करेंगे।

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बैठकों और संवाद से निकलेगा मंथन
नड्डा का दो दिवसीय दौरा 20 अगस्त से शुरू होगा। इस दौरे में वह 11 मुख्य बैठकों में सरकार संगठन और चुनावी तैयारियों की समीक्षा भी करेगे। इसके साथ ही पार्टी के अपने स्तर से कराए गए सर्वे और मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा भी करेगे। बीजेपी अपने सभी विधायकों के जीत और हार के गणित पर भी वर्कआउट कर रही है। जिन​ विधायकों की रिपोर्ट कार्ड अच्छी होगी उन्हें रिपीट किया जा सकता है और जिन विधायकों की रिपोर्ट खराब होगी, उनका टिकट भी कट सकता है। बीजेपी ने 3 बार सीएम जरुर बदले हैं लेकिन मंत्रियों की जिम्मेदारी में ज्यादा फेरबदल ​नहीं किए हैं। ऐसे में इस बार मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड भी परखा जाएगा। नड्डा के दौरे में सबसे अहम साधु संतों का अभिनंदन और आशीर्वाद कार्यक्रम भी है। इसके जरिए पार्टी अपनी छवि के अनुरुप ही चुनावों में अपना विजन रखेगी इसके लिए साधु संतों से सरकार का फीडबैक भी लिया जाएगा। जिसके आधार पर चुनाव की कमान किसको सौंपी जाई, यह चर्चा भी की जाएगी।

कार्यकारी अध्‍यक्ष को लेकर हो सकता है फैसला
बीजेपी पार्टी के सामने सबसे बडी चुनौती जनता के बीच गए 3 बार सीएम बदलने को मैसेज को सही साबित करने का भी बड़ा टारगेट है। हालांकि पार्टी ने अब युवा सीएम पुष्कर सिंह धामी के चेहरे को लेकर ही चुनाव में जाने का दावा किया है। ये बात अलग है कि बीजेपी हाईकमान दिल्ली से कब और क्या फैसला ले ले, इसकी कोई गांरटी नहीं है। इसके अलावा पार्टी के अंदर इस समय प्रदेश अध्यक्ष और सीएम पर नए चेहरे लाने के बाद जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने का भी चेलेंज खडा हो गया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के अलावा 4 कार्यकारी अध्यक्ष बनाने के फॉर्मूले के बाद बीजेपी के अंदरखाने भी गढ़वाल से कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की मांग तेजी से उठी है। बीते दिनों गढ़वाल के कई विधायक दिल्ली में डेरा भी डाल चुके हैं। नड्डा के सामने एक बार फिर कार्यकर्ता और ​गढ़वाल के विधायक इस मांग को दोहरा सकते हैं। जो कि चुनाव से पहले बीजेपी किसी को जिम्मेदारी सौंप कर इस विवाद को खत्म करने का प्रयास भी कर सकती है। वर्तमान में प्रदेश बीजेपी की कमान मदन कौशिक के हाथ में हैं जो कि तराई क्षेत्र के ब्राह्रमण चेहरे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कुमांउ का ठाकुर चेहरा है। ऐसे में पार्टी के अदंर ही गढ़वाल से किसी चेहरे को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने ​की तेजी से मांग उठ रही है। उत्तराखंड की राजनीति गढवाल, कुमांउ, तराई, ब्राह्रमण, क्षत्रिय के इर्द गिर्द ही घूमती आ रही है।

केजरीवाल को लेकर भी बनेगी रणनीति
आप और केजरीवाल के उत्तराखंड में आने के बाद बदले समीकरणों पर भी नड्डा फीडबैक लेंगे। केजरीवाल के मैदान में आने के बाद बीजेपी को अपनी चुनावी रणनीति भी बदलनी होगी। केजरीवाल पहले ही हिंदुत्व कार्ड, मुफ्त बिजली और सीएम फेस लाकर बीजेपी की मुश्किलें बढा चुके हैं, ऐसे में बीजेपी अपने हिंदुत्व वोटर को रिझाने के लिए नया दांव खेल सकती है। देवस्थानम बोर्ड को लेकर बैकफुट में पार्टी का आना इसी से जोडा जा रहा है।

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