Joshimath sinking update: होटलों के बाद अब गेस्ट हाउस और घरों की बारी, सीएम ने अधिकारियों को दिए ये निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में जोशीमठ में चल रहे राहत कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि जोशीमठ में भू-धसांव के कारणों को लेकर सभी तकनीकी संस्थानों एवं वैज्ञानिकों की रिपोर्ट आते ही तेजी से कार्य किया जाए।

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जोशीमठ में भू धंसाव और दरारों की समस्या बढ़ने के बाद अब होटल, गेस्ट हाउस और घरों को भी ध्वस्त करने की तैयारी चल रही है। सबसे पहले जीएमवीएन गेस्ट हाउस पर बुलडोजर चलाया जा रहा है। इन गेस्ट हाउस में ही रुककर वैज्ञानिक रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। लेकिन गेस्ट हाउस में दरार आनें से चिंता बढ़ गई है। अब प्रशासन नए ठिकाने तलाश रहा है। इसके साथ ही जिन घरों में अधिक दरारें हैं, उन्हें सबसे पहले ढहाया जाएगा। इसके लिए प्रशासन ने तैयारी कर ली है। जिसकी शुरुआत मनोहर बाग से किया जाएगा। इधर राहत शिविरों में भी दरारें आने से प्रशासन की चिंताए बढ़ गई है।

तकनीकी संस्थानों एवं वैज्ञानिकों की रिपोर्ट आते ही आगे की योजना पर तेजी से कार्य

उधर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सचिवालय में जोशीमठ में चल रहे राहत कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि जोशीमठ में भू-धसांव के कारणों को लेकर सभी तकनीकी संस्थानों एवं वैज्ञानिकों की रिपोर्ट आते ही आगे की योजना पर तेजी से कार्य किया जाए। जोशीमठ के भूधंसाव क्षेत्र के अध्ययन की फाइनल रिपोर्ट के बाद ट्रीटमेंट के कार्य तेजी से सुनिश्चित किए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विस्थापन के लिए वहां के लोगों से मिलकर सुझाव लिये जाएं। जिलाधिकारी चमोली स्थानीय लोगों से सुझाव लेकर शासन को रिपोर्ट जल्द से जल्द भेजें। मुख्यमंत्री ने कहा कि जोशीमठ के प्रभावित क्षेत्र से जिन लोगों को विस्थापित किया जायेगा, उनको सरकार की ओर से बेहतर व्यवस्थाएं की जायेंगी।

एनआईएच की प्राथमिक जांच रिपोर्ट में रिस रहा पानी और परियोजना के टनल का पानी अलग-अलग

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    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि राज्य के जिन शहरों में समुचित ड्रेनेज प्लान एवं सीवर सिस्टम नहीं हैं, उनमें ड्रेनेज एवं सीवर सिस्टम के लिए चरणबद्ध तरीके से कार्य योजना बनाई जाए। शहरों को श्रेणी वार चिन्हित किया जाए। सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा ने कहा कि राष्ट्रीय जल विज्ञान (एनआईएच) की प्राथमिक जांच रिपोर्ट में जोशीमठ में रिस रहा पानी और एनटीपीसी परियोजना के टनल का पानी अलग-अलग है। उन्होंने कहा कि अन्य केन्द्रीय एजेंसियों की रिपोर्ट एवं एनआईएच की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पायेगी। उन्होंने कहा कि जोशीमठ के भूधंसाव प्रभावित क्षेत्र के 258 परिवारों को राहत शिविरों में ठहराया गया है, उन्हें सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्र में पानी का डिस्चार्ज एवं सिल्ट दोनों काफी तेजी से कम हुआ है।

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