Uttarakhand: जोशीमठ के अलावा इन जगहों पर भी दरारों ने बढ़ाई चिंता, जानिए क्या उठाए गए कदम

जोशीमठ के अलावा कर्णप्रयाग, मसूरी, चंबा, टिहरी, रुद्रप्रयाग ​जिले में कई जगहों पर भू धंसाव और दरारों ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे जगहों को चिह्रित कर सरकार लगातार मॉनिटरिंग कर रही है।

Joshimath landslide cracks have raised concern places too tehri mussorie karanprayag rudraprayag

जोशीमठ के अलावा प्रदेश सरकार की दूसरे जगहों पर भू धंसाव और दरारों को लेकर आ रही समस्या पर नजर बनी हुई है। ऐसे जगहों को चिह्रित कर सरकार लगातार मॉनिटरिंग कर रही है। कर्णप्रयाग, मसूरी, चंबा, टिहरी, रुद्रप्रयाग ​जिले में कई जगहों पर भू धंसाव और दरारों ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

एनजीटी ने मसूरी के लिए समिति का गठन किया

मसूरी के लंढौर क्षेत्र की मुख्य सड़क लगातार धंसने से लोगों में दहशत का माहौल है। लोगों ने सड़क धंसने की वजह मुख्य बाजार के निचले हिस्से में हो रहे अवैध खुदान और निर्माण बताया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण, एनजीटी ने जोशीमठ आपदा पर संज्ञान लेते हुए मसूरी का विशिष्ट अध्ययन करने के लिए सचिव की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय समिति का गठन किया है। एनजीटी ने इस मामले में 30 अप्रैल तक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। टिहरी झील से लगते उन गांवों में इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं जहां से चंबा टनल गुजर रही है। इन घटनाओं से दो दर्जन से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं। यहां भी मकानों में दरार के लिए लोगों ने टनल को जिम्मेदार बताया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक उनके घर टनल से महज तीन से चार मीटर की ही दूरी पर हैं, मकानों में दरारें आ चुकी हैं।

टिहरी जिले में बांध प्रभावित 16 गांवों की चिंता भी बढ़ने लगी

टिहरी जिले के चंबा में मकानों और भवनों में दरारें आई हैं, मकानों के दरकने को लेकर लोगों में काफी परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। इससे पहले कर्णप्रयाग में भी मकानों में दरारें आई हैं। टिहरी जिले में बांध प्रभावित भिलंगना और भागीरथी क्षेत्र के 16 गांवों के निवासियों की चिंता भी बढ़ने लगी है। भट कंडा, लुणेठा और पिपोलाखास गांव में तो इन दिनों फिर से दरारें गहरी होने लगी हैं। वहीं टिहरी जिले में ही ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे पर बनी सुरंग के ऊपर भूधंसाव से मठियाण गांव के कई मकानों में दरारें पड़ने से वो रहने लायक नहीं रहे।
चमोली जिले के कर्णप्रयाग में भी लगभग 60 घरों में दरारें आने के बाद तहसील प्रशासन ने आठ भवनों को रहने लायक नहीं बताते हुए परिवारों को रैन-बसेरे में शिफ्ट कर दिया है। वहीं, रुद्रप्रयाग जिले में गुप्तकाशी के पास सेमी भैसारी गांव पूरी तरह भूधंसाव की चपेट में है। यहां आवासीय भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने से प्रभावित घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर रहने को मजबूर हैं।

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    रुद्रप्रयाग जिले में पिछले कुछ महीनों से लगातार भूस्खलन

    वर्ष 2013 में आई आपदा के बाद से ही रुद्रप्रयाग से 40 किमी दूर गुप्तकाशी के पास बसा सेमी भैसारी गांव भूधंसाव का दंश झेल रहा है। गांव के तीन दर्जन से अधिक होटल, लाज और आवासीय भवन भूधंसाव से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ऐसे में प्रभावित परिवार दूसरे स्थानों पर रहने को मजबूर हैं। वर्तमान में भी यहां भूधंसाव जारी है। रुद्रप्रयाग जिले के मरोड़ा गांव में पिछले कुछ महीनों से लगातार भूस्खलन हो रहा है। कई घरों में दरारें पड़ी हुई है। चंपावत जिला प्रशासन ने भू्धंसाव के कारण टनकपुर स्थित मां पूर्णागिरि धाम की पहाड़ी में पड़ रही दरारों की जांच के लिए समिति का गठन किया है। पूर्णागिरि धाम में कटोजिया भैरव मंदिर के पास मार्ग में मंदिर को जाने वाले मार्ग पर दरारें चौड़ी हो गई हैं। जिससे पूर्णागिरि धाम के साथ यहां रह रहे पुजारियों को खतरा पैदा हो गया है।

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