डीएम छुट्टी के दिन निभाते हैं डॉक्टर की भूमिका, पहाड़ों में सेवा से बचने वाले अफसरों के लिए पेश कर रहे मिसाल
आईएएस अफसर टिहरी जिले के डीएम डॉक्टर सौरभ गहरवार डीएम की भूमिका निभाने केे साथ-साथ डॉक्टर की भूमिका भी निभाकर पहाड़ की स्वास्थ्य सिस्टम को सुधारने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

उत्तराखंड में कई आईएएस अफसर पहाड़ों में अपनी सेवाएं देकर दूसरे अफसरों के लिए मिसाल पेश कर रहे हैं। इतना ही नहीं कुछ अफसर सिर्फ प्रशासनिक सेवा में ही अपनी भूमिका मेंं नजर नहीं आते बल्कि पहाड़ की समस्याओं के समाधान के लिए अपनी ड्यूटी के अलावा छुट्टी के दिन भी समाज की सेवा में जुटे हैं। ऐसे ही एक आईएएस अफसर हैं टिहरी जिले के डीएम डॉक्टर सौरभ गहरवार। जो कि डीएम की भूमिका निभाने केे साथ-साथ डॉक्टर की भूमिका भी निभाकर पहाड़ की स्वास्थ्य सिस्टम को सुधारने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
रविवार को सरकारी अस्पताल में भी जाकर सेवाएं दे रहे हैं
एक तरफ कई अफसर पहाड़ों में सेवा करने से बचते हैं। इतना ही नहीं कई डॉक्टर भी पहाड़ों मे ड्यूटी नही करना चाहते हैं। ऐसे अफसरों और डॉक्टर के लिए मिसाल पेश की है टिहरी जिले के डीएम डॉ सौरभ गहरवार ने। टिहरी जिले के जिलाधिकारी डॉ सौरभ गहरवार हर रविवार को सरकारी अस्पताल में भी जाकर सेवाएं दे रहे हैं और मरीजों का इलाज कर रहे हैं। टिहरी जिले के डीएम डॉ सौरभ गहरवार प्रशासनिक सेवा में आने से पहले रेडियोलॉजिस्ट के तौर पर कार्यरत थे।
43 लोगों के अल्ट्रासाउंड किए
डीएम डॉ. सौरभ गहरवार रेडियोलॉजी में एमडी हैं और उनका मानना है कि जहां-जहां अल्ट्रासाउंड मशीनें हैं, वहां कम से कम अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध करायी जा सके। जिले में रेडियोलॉजिस्ट की कमी को देखते हुए उन्होंने ये तय किया है कि वे हर रविवार को अस्पताल में जाकर खुद अल्ट्रासाउंड करेंगे। इस रविवार को उन्होंने त्रेपन सिंह नेगी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलेश्वर में डॉक्टर की भूमिका निभाई और 43 लोगों के अल्ट्रासाउंड किए। इस दौरान डीएम ने लोगों के हाल चाल भी जाना और समस्याओं को सुना। डीएम ने अस्पताल की भी समस्याओं के बारे में जानकारी ली और निरीक्षण कर व्यवस्थाएं दुरस्त करने के निर्देश दिए।
वर्ष 2016 बैच के आईएएस, एम्स दिल्ली से एमडी
डीएम सौरभ गहरवार वर्ष 2016 बैच के आईएएस हैं। जिन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई बीएचयू से की है। इसके बाद एम्स दिल्ली से एमडी किया। सौरभ गहरवार की जहां भी तैनाती होती है, वहां अपनी छाप छोड़ देते हैं। दूसरे जिलों में भी वे कई प्रशासनिक पद पर रहें हैं, वहां भी उन्होंने इस तरह स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी सेवाएं दी हैं।












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