उत्तराखंड में 38 सीटें कैसे बिगाड़ सकती है भाजपा, कांग्रेस का गणित, हरदा भी कर रहे स्वीकार, जानिए
दोनों के दावों में 38 सीटें आ रही काल्पनिक
देहरादून, 22 फरवरी। उत्तराखंड में चुनाव के बाद भाजपा और कांग्रेस चुनावी समीक्षा में जुटे हैं। इस बीच दोनों दलों के अपने-अपने दावे हैं। भाजपा जहां 70 में से 60 सीटें जीतने का दावा कर रही है। तो कांग्रेस 48 सीटों के बदौलत सरकार बनाने का दावा कर रही है। इस तरह से 108 सीटें होती हैं। जिससे साफ है कि दोनों के दावों में 38 सीटें ऐसी हैं, जिनमें कड़ा मुकाबला होने जा रहा है। कांग्रेस के बड़े नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी ये स्वीकार किया है कि 38 सीटें दोनों दलों के लिए काल्पनिक हैं।

70 सीटें, 36 है जादुई आंकड़ा
प्रदेश में विधानसभा की 70 सीटें है। बहुमत के लिए 36 का आंकड़ा छूना होता है। चुनाव के बाद भाजपा के 60 और कांग्रेस की 48 सीटों पर जीतने का दावा सामने आया है। इस तरह से दोनों दलों की सीटों को मिला दें तो कुल 108 सीटें होती है। जो कि कुल 70 सीटों से 38 सीटें ज्यादा हैं। इस तरह से दोनों दलों के गणित में 38 सीटें ऐसी हैं, जो कि फंसी हुई मानी जा सकती है। कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से भी एक इंटरव्यू में जब ये सवाल किया गया तो वे भी इस बात को स्वीकार करते हैं। हरीश रावत ने कहा कि ये 38 सीटें काल्पनिक हैं। साफ है भाजपा और कांग्रेस अंदरखाने इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि जो दावे जीत के उनके नेताओं की ओर से हो रहे हैं। उनमें होमवर्क करने की अभी भी आवश्यकता है।

40 सीटों पर भाजपा, कांग्रेस में सीधी टक्कर
बूथ मैनेजमेंट देख रहे कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट के बाद भी भाजपा, कांग्रेस में अंदरखाने इस बात पर चर्चा हो रही है, कि धरातल पर जिस तरह की वोटिंग हुई है, उसमें कौन कितनी सीटों पर जीत की स्थिति में हैं। जहां तक भाजपा, कांग्रेस की बात करें तो 40 सीटों पर दोनों दल सीधे मुकाबले में हैं, जबकि 30 सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले में बसपा, आप, यूकेडी और निर्दलीय भी हैं। साफ है कि ये सीटें ही भाजपा और कांग्रेस के गणित में सही नहीं बैठती नजर आ रही हैं। इनमें से 10 सीटों पर सीधे-सीधे भाजपा, कांग्रेस को नुकसान होता हुआ नजर आ रहा है। ये भी मान सकते हैं कि इन सीटों पर भाजपा, कांग्रेस के अलावा दूसरा बाजी मार सकता है। अब बची 20 सीटों पर ही भाजपा, कांग्रेस में नेट टू नेट की फाइट होगी, इनमें त्रिकोणीय मुकाबले होने के बाद भी भाजपा, कांग्रेस में से कोई एक बाजी मारेगी जो कि सीधे बहुमत के आसपास पहुंचा सकता है। इस बात को कांग्रेस और भाजपा के रणनीतिकार भी अंदरखाने स्वीकार करते हैं।

भाजपा, कांग्रेस के लिए काल्पनिक हैं ये सीटें
भाजपा, कांग्रेस जिन सीटों को लेकर पूरी तरह से असमजंस में हैं, उनमें पहले तो निर्दलीय जहां ज्यादा मजबूत दिख रहे हैं, वे सीटें यमुनोत्री, टिहरी, धर्मपुर, केदारनाथ, रुद्रपुर सीटें शामिल हैं। जबकि हरिद्वार की 11 में से 6-7 सीटों और उधमसिंह नगर की 3 सीटों पर बसपा भाजपा, कांग्रेस को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। उत्तराखंड क्षेत्रीय दल यूकेडी देवप्रयाग में तो आम आदमी पार्टी काशीपुर, बागेश्वर, कपकोट में त्रिकोणीय मुकाबला बना रहे हैं। ये सीटें ही भाजपा, कांग्रेस के लिए काल्पनिक मानी जा सकती हैं।












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