भीख मांग रही हंसी से मिलने पहुंचीं राज्य मंत्री रेखा आर्य, दिया ये ऑफर

हरिद्वार। एक महिला सड़क किनारे अपने बच्चे को फर्राटेदार अंग्रेजी में पढ़ा रही थी, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। जब उस महिला से उसकी परिस्थिति के बारे में पूछा गया तो उसकी कहानी सुन हर कोई भावुक हो गया। वहीं, जब हंसी प्रहरी सोशल मीडिया और खबरों में सुर्खियां बनी तो प्रदेश सरकार भी उनकी मदद के लिए आगे आई है। महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री रेखा आर्य ने हरिद्वार पहुंचकर हंसी से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना।

राज्यमंत्री रेखा आर्य ने हंसी प्रहरी से की मुलाकात

राज्यमंत्री रेखा आर्य ने हंसी प्रहरी से की मुलाकात

महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री रेखा आर्य 20 अक्टूबर को जवाहर लाल नेहरू युवा केंद्र पहुंचीं। यहां करीब एक घंटे तक उन्होंने हंसी प्रहरी से बंद कमरे में मुलाकात की। बाद में पत्रकारों से बातचीत में रेखा आर्य ने कहा कि हंसी को महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग में नौकरी दी जाएगी। बताया कि जब हंसी के सामने नौकरी करने का प्रस्ताव रखा गया तो उन्होंने इस पर विचार करने के लिए एक दिन का समय मांगा। राज्यमंत्री रेखा आर्य ने कहा कि यदि वह विभाग में नौकरी करने को तैयार हो जाती हैं तो उनको आवास की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी और उनके बेटे की पढ़ाई भी हो जाएगी।

हंसी की हालत के पीछे जिम्मेदार लोगों पर होगी कार्रवाई

हंसी की हालत के पीछे जिम्मेदार लोगों पर होगी कार्रवाई

उन्होंने कहा कि फिलहाल हंसी के रहने की व्यवस्था करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं। इतना ही नहीं, रेखा आर्य ने हंसी की काउंसलिंग कराने और उसकी इस हालत के पीछे जिम्मेदार लोगों पर भी सख्त कार्रवाई करने की बात कही। बता दें कि अल्मोड़ा जिले के हवालबाग ब्लॉक स्थित ग्राम रणखिला गांव की रहने वाली हंसी प्रहरी हाल ही में खबरों की सुर्खियां बनी थी। जिसके बाद कई संगठन उनकी मदद को आगे आए थे और प्रशासन ने भी तीन दिन के भीतर आवास उपलब्ध कराने को कहा था।

2000 में लड़ा था छात्र संघ चुनाव

2000 में लड़ा था छात्र संघ चुनाव

बता दें कि हंसी प्रहरी बचपन से ही पढ़ने लिखने में काफी तेज-तर्रार है और अपनी इंटर तक की पढ़ाई गांव से ही पूरी की। इसके बाद उन्होंने कुमाऊं विश्वविद्यालय के अल्मोड़ा परिसर में एडमिशन लिया। मीडिया से बात करते हुए हंसी ने बताया कि उन्होंने अपने कॉलेज के दिनों में कई शैक्षणिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। बतौर हंसी साल 2000 में उन्हें छात्र संघ में उपाध्यक्ष चुना गया, उसके बाद वह चार सालों तक विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी में नैकरी की। मीडिया का हंसी पर ध्यान उस समय गया जब रविवार को वह सड़क किनारे अपने बच्चे को पढ़ाती नजर आई। उनकी फर्राटेदार अंग्रेजी सुनकर आस-पास से गुजरने वाला शख्स भी हैरान रह गया।

ससुराल वालों से परेशान होकर छोड़ा था घर

ससुराल वालों से परेशान होकर छोड़ा था घर

सभी जानना चाहते थे कि आखिर इतनी पढ़ी-लिखी महिला की आखिर क्या मजबूरी है जो उसे इस तरह भीख मांगना पड़ रहा है। तो वहीं, हंसी बताती हैं कि ससुराल वालों के कलह से परेशान होकर उन्होंने साल 2008 में अपने पति का घर छोड़ दिया था। वह लखनऊ से वापस अपने पैतृक गांव चली आईं थी। वह शारीरिक रूप से काफी कमजोर हो गई थीं, उनके पास इतनी भी हिम्मत नहीं थी कि वह कहीं नौकरी कर सकें। कमजोरी के कारण वह रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर भीख मांगकर गुजारा करने लगीं। हालांकि इन हालातों में भी हंसी ने हार नहीं मानी और अपनी मुश्किलों से लड़ने का फैसला किया।

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