उत्तराखंड में रिसर्च के लिए यहां मिल रहा 15 लाख तक का अनुदान, ऐसे करें आवेदन, जानें पूरी प्रक्रिया
उत्तराख्ंड में मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना के लिए समर्थ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसमें 15 दिसंबर तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। चयनित शोध प्रस्तावों को 15 लाख रुपये तक अनुदान दिया जाएगा। विशेष परिस्थिति में इसे बढ़ाकर 18 लाख किया जा सकेगा। शोध कार्य पूरा करने के लिए दो वर्ष का समय दिया जाएगा। पांच लाख रुपये से अधिक की शोध परियोजना में नियमित छात्र अथवा शोध अध्येताओं को शोध सहयोगी के रूप में जोड़ना अनिवार्य होगा।

मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना के तहत मानविकी, सामाजिक विज्ञान, भाषा, साहित्य, पर्यावरण, ज्वलंत मुद्दों, उत्तराखंड विकास पर शोध, पर्यटन, परंपरागत विज्ञान, इंजीनियरिंग में उभरते क्षेत्रों में शिक्षण और शोध को प्रोत्साहित किया जाएगा। शोध के लिए व्यापक विषय क्षेत्र विज्ञान, कला एवं मानविकी, गृह विज्ञान, वाणिज्य प्रबंधन सहित अंतर्विषयक विषय क्षेत्र भी स्वीकार किए जाएंगे। राज्य से संबंधित शोध विषयों को प्रोत्साहित करते हुए विशिष्ट समस्या समाधान और क्रियात्मक शोध विषयों को वरीयता दी जाएगी।
शोध प्रोत्साहन योजना के लिए राज्य के शासकीय महाविद्यालयों, अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों तथा राज्य विवि परिसरों में कार्यरत नियमित प्राध्यापक और नियमित संस्थागत रूप में अध्ययनरत छात्र एवं शोध अध्येता पात्र होंगे। मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना विभाग की ओर से निर्धारित वार्षिक कैलेंडर के अनुसार संचालित होगी। इस साल 20 शोधार्थियों को इस योजना का लाभ दिया जाएगा।
ऐसे होगा चयन
समर्थ पोर्टल पर आवेदन के बाद संस्था के प्राचार्य या कुलसचिव आवेदन पत्र को आनलाइन पोर्टल के माध्यम से अग्रसारित करेंगे। इसके बाद राज्य स्तरीय शोध एवं विकास प्रकोष्ठ, चयन एवं मूल्यांकन समिति के माध्यम से मूल्यांकन कर उत्कृष्ट शोध प्रस्तावों का चयन किया जाएगा।
ऐसे होंगे आवेदन
मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना के लिए ऑनलाइन समर्थ पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा। प्रस्तावित योजना के अंतर्गत सचिव, उच्च शिक्षा की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय शोध एवं विकास प्रकोष्ठ समिति का गठन किया जाएगा।
तीन किस्तों में मिलेगी शोध की धनराशि
शोध के लिए 15 लाख रुपये अनुदान मिलेगा, जिसे जिसे विशेष परिस्थितियों में अत्यंत महत्व के शोध के लिए राज्य शोध एवं विकास प्रकोष्ठ समिति की संस्तुति के आधार पर अतिरिक्त 20 प्रतिशत तक बढ़ाते हुए कुल 18 लाख रुपये तक अनुमन्य किया जा सकता है। शोध की अनुदान राशि तीन किस्तों में संस्था के शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के खाते में डीबीटी के माध्यम से दी जाएगी।












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