फिर चर्चा में पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत, लोकसभा चुनाव से पहले जानिए क्यों बढ़ सकती है मुश्किलें
उत्तराखंड की राजनीति में हरक सिंह रावत बड़े खिलाड़ी के रुप में जाने जाते हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में जाने के बाद विधानसभा चुनाव न लड़कर हरक लंबे समय तक किसी भी विवाद से दूर नजर आए।
उत्तराखंड की राजनीति में हरक सिंह रावत बड़े खिलाड़ी के रुप में जाने जाते हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में जाने के बाद विधानसभा चुनाव न लड़कर हरक लंबे समय तक किसी भी विवाद से दूर नजर आए। इस बीच हरक सिंह हरिद्वार लोकसभा चुनाव में चुनाव लड़ने को लेकर अपनी सक्रियता दिखाने लगे और पार्टी हाईकमान ने हरक सिंह को राजस्थान विधानसभा चुनाव में भी समन्वयक की अहम जिम्मेदारी सौंप दी। लेकिन बुधवार को हरक सिंह एक बार फिर सुर्खियों में आ गए।

देहरादून स्थित उनके बेटे के मेडिकल कॉलेज में विजिलेंस टीम पहुंच गई और दस्तावेज खंगालने लगे। सोशल मीडिया में हरक सिंह के बेटे के कॉलेज से कई अहम दस्तावेज हाथ लगने और जनरेटर विवाद भी चर्चा में आ गया है। उनके बेटे के संस्थान से विजिलेंस की कार्रवाई में करीब 15 लाख रुपये के दो जेनरेटर ले गए हैं। इस बीच हरक सिंह के वन मंत्री रहते काॅर्बेट टाइगर रिजर्व में कालागढ़ वन प्रभाग के पाखरो टाइगर सफारी निर्माण के बहुचर्चित मामले में सियासत भी गरमा गई है।
भाजपा की त्रिवेंद्र सरकार के कार्यकाल में कालागढ़ टाइगर रिजर्व प्रभाग के पाखरो में 106 हेक्टेयर वन क्षेत्र में टाइगर सफारी के निर्माण का निर्णय लिया गया। लेकिन सफारी के निर्माण में पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी और बड़े पैमाने पर पेड़ कटान की शिकायत पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की टीम ने स्थलीय निरीक्षण किया। और कई अनियमितताएं पाई गई। इस प्रकरण में तत्कालीन मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग और कालागढ़ के तत्कालीन डीएफओ किशन चंद को निलंबित कर दिया गया था। दोनों अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। साथ ही कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक राहुल से कुछ समय बाद वन मुख्यालय से संबद्ध किया गया था। सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी ने भी इस प्रकरण पर कड़ा रुख अपनाया था।
पूर्व मंत्री हरक सिंह के कर्मकार कल्याण बोर्ड घोटाला, अवैध पेड़ कटान व स्टिंग प्रकरण में सीबीआई और विजिलेंस की जांच से आने वाले समय में मुश्किलें बढ़ गई हैं। हरक सिंह को सियासत का मौसम वैज्ञानिक माना जाता है जो कि चुनाव से पहले ही सियासत की हवा को परखने के एक्सपर्ट माने जाते हैं। हालांकि 2022 में उनका अंदाजा गलत साबित हुआ। माना जाता है कि हरक सिंह के कांग्रेस में जाने की चर्चा के बीच भाजपा ने पहले ही हरक को बाहर का रास्ता दिखा दिया। इससे पहले 2016 की हरीश रावत की कांग्रेस सरकार में हुए बगावत के लिए भी हरक सिंह को ही सूत्रधार माना जाता है।












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