एग्जिट पोल के बाद उत्तराखंड कांग्रेस में खलबली, पूर्व सीएम हरीश रावत की भविष्यवाणी का होगा क्या?
उत्तराखंड में कांग्रेस लोकसभा चुनाव की वोटिंग के बाद कम से कम दो सीटों पर जीत की संभावना लेकर चल रही थी। जिस पर एग्जिट पोल ने फिलहाल पानी फेर दिया है।
इतना ही नहीं कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व सीएम हरीश रावत की भविष्यवाणी भी गलत साबित होती हुई नजर आ रही है। हालांकि कांग्रेस अभी भी जीत का दावा कर रही है।

कांग्रेस का कहना है कि एग्जिट पोल कई बार गलत साबित हुए हैं। ऐसे में सबको चार जून का इंतजार है। जब परिणाम सबके सामने आएंगे।
पहले बात हरीश रावत की। कांग्रेस के उत्तराखंड में सबसे दिग्गज नेता हरीश रावत ने इस बार लोकसभा चुनाव न लड़ने का मन बनाया। लेकिन उन्होंने अपनी विरासत को आगे बढ़ाते हुए अपने बेटे वीरेंद्र रावत को हरिद्वार से चुनावी मैदान में उतारा। हरीश रावत ने हरिद्वार सीट पर पूरी ताकत झौंक दी।
यहां तक की हरीश रावत ने किसी दूसरी सीट पर एक घंटे के लिए भी समय नहीं दिया। हरिद्वार चुनाव को हरीश रावत ने अपने लिए बड़ा चेलेंज मानते हुए बेटे के लिए पूरा जोर लगा दिया। यहां तक की लोगों ने ये तक कह दिया कि पर्दे के पीछे से हरीश रावत की चुनाव लड़ रहे हैं। हरदा का पूरा मैनेजमेंट चुनाव लड़ते हुए नजर आया। हरीश रावत चुनाव के बाद जीत को लेकर आश्वस्त भी नजर आया।
हरीश रावत का दावा है कि हरिद्वार और पौड़ी की सीट को लेकर लोगों में ज्यादा उत्सकुता है। यानि उन्होंने इन दोनों सीट पर जीत का दावा किया है। इसके साथ ही टिहरी, नैनीताल व अल्मोड़ा सीट पर चौंकाने वाली जीत की भविष्यवाणी की है। जो कि फिलहाल एग्जिट पोल से तो सही होती हुई नजर नहीं आ रही है। 4 जून को परिणाम क्या रहते हैं। इसका भी सबको इंतजार का है।
अब बात कांग्रेस संगठन की। शुरूआत से ही कांग्रेस इस बार प्रत्याशियों के चयन को लेकर कन्फ्यूज नजर आई। जो कांग्रेस के संभावित प्रत्याशी थे, उनमें से कई भाजपा के साथ चले गए। चुनाव में सिर्फ गणेश गोदियाल ही गढ़वाल सीट पर फाइट देते नजर आए। लेकिन वहां भाजपा के अनिल बलूनी ने जीत के लिए सारे बड़े चेहरे उतार दिए।
कांग्रेस संगठन का कोई भी बड़ा चेहरा पांचों सीटों पर पूरे दमखम के साथ नजर नहीं आया। हरीश रावत हरिद्वार से बाहर नहीं गए। ऐसा लगा मानों प्रत्याशियों को पार्टी ने उनकी किस्मत पर ही छोड़ दिया। अब 4 जून को परिणाम का इंतजार है। जिस तरह एग्जिट पोल बता रहे हैं और परिणाम कांग्रेस के विपरीत गए तो फिर कांग्रेस में एक बार फिर बड़े स्तर पर फेरबदल से लेकर बदलाव दिखना तय है।












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