पहले अभिनंदन, फिर आंदोलन और अब आश्वासन, इस तरह खत्म हो गई सचिवालय संघ की हड़ताल, जानिए पूरा मामला

पहले अभिनंदन, फिर आंदोलन और अब आश्वासन, इस तरह खत्म हो गई सचिवालय संघ की हड़ताल

देहरादून, 10 दिसंबर। पहले अभिनंदन फिर आंदोलन और बाद में आश्वासन के बाद हड़ताल खत्म, कुछ ऐसा ही उत्तराखंड सचिवालय संघ के कर्मचारियों के आंदोलन के दौरान नजर आया। सचिवालय संघ ने पहले बीते सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कर्मचारियां की मांगों पर सकारात्मक पहल करने पर अभिनंदन किया लेकिन जब कैबिनेट में कर्मचारियों की मांग पर कोई फैसला नहीं हुआ तो मंगलवार को कर्मचारियों ने आंदोलन शुरू कर दिया। इसके दो दिन बाद सचिवालय संघ ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की, मुख्यमंत्री ने सभी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया। जिसके बाद सभी कर्मचारी काम पर लौट आए। सचिवालय संघ अपनी 6 मांंगोंं को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहा थाा इस तरह से सीएम ने कर्मचारियों को मनाने में अपनी रणनीति में पास हाे गए हैं।

 First congratulations, then agitation and now assurance, this is how the strike of the secretariat union ended, know the whole matter

सीएम ने संघ की सभी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन

गुरुवार रात सचिवालय संघ अध्यक्ष दीपक जोशी व महासचिव विमल जोशी के नेतृत्व में सचिवालय संघ के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने संघ की सभी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया। सीएम से मुलाकात के बाद सचिवालय संघ ने हड़ताल खत्म करने का फैसला लिया। विधानसभा सत्र से ठीक पहले सप्ताह शुरू होते ही सरकार और कर्मचारी आमने सामने आ गए। मांगें पूरी न होने पर कर्मचारियों ने आंदोलन शुरू किया तो कर्मचारियों के आंदोलन को देखते हुए सरकार ने पहली बार सख्त रुख अपनाया। मुख्य सचिव ने नो वर्क नो पे नियम लागू किया था। जिसके बाद कर्मचारी और सरकार में तनातनी नजर आई। इससे पहले सोमवार को दिन में सचिवालय संघ ने मुख्‍यमंत्री पुष्कर सिंंह धामी का कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने के लिए अभिनंदन समारोह आयोजित किया। लेकिन कैबिनेट की बैठक में भत्ते सहित किसी भी मांग के न आने के बाद सचिवालय संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सचिवालय में सभी अनुभागों में कर्मचारियों ने काम रोक दिया बाद में हड़ताल पर चले गए हैं। साथ ही सरकार को जल्द से जल्द कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान निकालने की मांग कीा

पहली बार सरकार ने सख्‍त रुख अपनाया

धामी सरकार ने पहली बार कर्मचारियों की हड़ताल पर सख्त रुख अपनायाा सरकार ने हड़ताली कर्मियों से निपटने के शासन को निर्देश दिए। मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधू की और से सभी अधिकारियों के नाम एक आदेश जारी किया गया कि सभी तरह के प्रदर्शन, हड़ताल पर काम नहीं तो वेतन नहीं का फार्मूला लागू होगा। जो भी हड़ताल करेगा, उसे अनुपस्थित अवधि का वेतन नहीं दिया जाएगा। दो दिन तक कर्मचारी सचिवालय के गेट पर डटे रहे। गुरूवार रात में सचिवालय संघ की मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई। जिसके बाद संघ और सीएम में सहमति बन गई। और इस तरह हड़ताल खत्म हो गई। लेकिन इस प्रकरण के बाद सचिवालय संघ का दूसरा खेमा अपने पदाधिकारियों पर सवाल खड़ा कर रहा है। हड़ताल को लेकर जिस तरह से जल्दबाजी दिखाई गई, उससे संघ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। जिसको लेकर कुछ कर्मचारी नेता संघ के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं।

सचिवालय संघ की प्रमुख मांगें

  • सचिवालय भत्ता अब तक ग्रेड पे पर 50 फीसदी है, इसे बदलकर मूल वेतन पर 10 फीसदी किया जाए।
  • चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के ग्रेड पे को बढ़ाने की मांग।
  • पांच वर्ष अनुभव वाले समीक्षा अधिकारियों के 4800 ग्रेड-पे को बढ़ाने की मांग।
  • राज्य संपत्ति विभाग के वाहन चालकों को सचिवालय प्रशासन में सम्मलित करने की मांग।
  • सचिवालय सुरक्षा कर्मियों को पुलिस सैलरी स्लैब से अगले वेतन की मांग।
  • पुरानी पेंशन मामले पर भी कर्मचारियों की मांग।

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