कुर्सी संभालने से पहले ही कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने दिखाए सख्त तेवर, कह दी बड़ी बात
करन बोले—संगठन का स्वरूप होगा छोटा, काम करने वालों को तरजीह
देहरादून, 14 अप्रैल। कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा 17 अप्रैल को कमान संभालने जा रहे हैं। लेकिन जिस तरह के तेवर करन माहरा पदभार संभालने से पहले दिखा रहे हैं। उससे साफ है कि हाईकमान की ओर से करन को पूरी छूट दी गई है। ऐसे में करन माहरा की संगठन टीम पर भी अब सबकी नजर टिकी हुई है। करन माहरा अपनी टीम को लेकर भी साफ कर चुके हैं, कि उनकी टीम छोटी और प्रभावशाली होगी।

करन माहरा ने दी सख्त हिदायत
उत्तराखंड कांग्रेस में बदलाव के बाद से ही उठापटक देखने को मिल रही है। कांग्रेस के सीनियर नेताओं की नाराजगी खुलकर सामने आ चुकी है। लेकिन इस बीच नए नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष के तेवर बिल्कुल अलग ही नजर आ रहे हैं। करन माहरा ने नाराज विधायकों को भी दो टूक कहा है कि वे पार्टी के सिंबल पर जीतकर आए हैं। जिसमें जनता ने पार्टी के विचारधारा को देखकर ही उन्हें जीताया है। ऐसे में अपने क्षेत्र की जनता का जनादेश का ख्याल रखना चाहिए। करन माहरा के तेवर से साफ है कि नाराज विधायकों को लेकर उन्हें इस बात की कतई चिंता नहीं है। पार्टी हाईकमान भी नाराज विधायकों से सख्ती के मूड में है।
संगठन का स्वरूप होगा छोटा, काम करने वालों को तरजीह
करन माहरा ने सभी विधायकों और संगठन में काम करने के इच्छुक नेताओं को साफ कर दिया कि अब काम करने वालों को ही तरजीह दी जाएगी। प्रदेश अध्यक्ष ने चाटुकार नेताओं को साफ किया कि अब गणेश परिक्रमा नहीं चलेगी। जिन लोगों की अपने क्षेत्र में पकड़ है या जमीनी कार्यकर्ता हैं, उनको ही संगठन में काम करने का मौका दिया जाएगा। करन माहरा के इस बयान को निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के संगठन टीम से भी जोड़ा जा रहा है। गणेश गोदियाल चुनाव के कारण संगठन पर ध्यान नहीं दे पाए। साथ ही इससे पहले हरीश रावत खेमा और प्रीतम सिंह खेमा पक्ष को ही संतुलन बैठाने की प्रदेश अध्यक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती नजर आई थी। जिस वजह से कांग्रेस की एक अच्छी खासी जंबो टीम बनी हुई थी। करन माहरा ने अब संगठन में कम लोगों को जगह देने की बात की है। उन्होंने कहा है कि उनकी टीम छोटी होगी।
किसी को संतुष्ट करना आसान नहीं
हालांकि जब करन माहरा संगठन का विस्तार करेंगे तो किन-किन चेहरों को शामिल करते हैं। लेकिन ये बात भी तय है कि जिस तरह से कांग्रेस के अंदर हालात हैं, उसमें किसी को संतुष्ट करना आसान नहीं होगा। ऐसे में पहले से ही क्षेत्रीय संतुलन का सही संतुलन न होने का आरोप लगा रहे विधायक और नेता करन माहरा की काम करने की शैली को कब तक पचा पाएंगे। ये देखना भी दिलचस्प होगा। फिलहाल तो करन के सामने प्रीतम खेमा और नाराज विधायकों को मनाने का सबसे बड़ा चेलेंज है। इसके साथ ही हरीश रावत के करीबी रहे नेताओं को भी अपने साथ जोड़ने का उन पर दबाव है। पार्टी हाईकमान 2024 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए टीम को मजबूत बनाना चाहती है। लेकिन जिस तरह काम संभालने से पहले ही करन माहरा के सामने कांग्रेस बिखरी हुई नजर आ रही है। उस टीम को खड़ा करना आसान नहीं होगा।












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