देश का पहला गांव माणा, पांडवों के स्वर्ग जाने का रहस्य और महाभारत काल से जुड़े कई रोचक तथ्य
उत्तराखंड का माणा देश का पहला गांव बन गया है। इस गांव की रहस्यमयी और पौराणिक मान्यताएं खास हैं। इस गांव का रिश्ता महाभारत काल से भी जुड़ा हुआ है और भगवान गणेश से भी।

उत्तराखंड का सीमांत गांव माणा अब देश का पहला गांव बन गया है। इस गांव की सांस्कृतिक विरासत जितनी खूबसूरत है, उतनी ही रहस्यमयी और पौराणिक मान्यताएं खास हैं। इस गांव का रिश्ता महाभारत काल से भी जुड़ा हुआ है और भगवान गणेश से भी।
मणिभद्र देव के नाम पर 'माणा'
मान्यता है कि इस गांव से होकर ही पांडव स्वर्ग गए थे। इस गांव में रडंपा जाति के लोग रहते हैं। यह गांव बद्रीनाथ से चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जो चीन की सीमा से लगा हुआ है। कहते हैं कि इस गांव का नाम मणिभद्र देव के नाम पर 'माणा' पड़ा था। इस गांव को शापमुक्त और पापमुक्त भी माना जाता है। इस गांव से जुड़ी एक और मान्यता है कि यहां आने वाले हर व्यक्ति की गरीबी दूर हो जाती है।
तिब्बत की दूरी महज 26 किलोमीटर
मान्यता है कि इस गांव को भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद मिला हुआ है कि जो भी यहां आएगा, उसकी गरीबी दूर हो जाएगी। गांव तिब्बत सीमा के समीप है। यहां से तिब्बत की दूरी महज 26 किलोमीटर है। दो महत्वपूर्ण नदियां अलकनंदा और सरस्वती का संगम भी माणा गांव में हुआ है।
महाभारत की रचना गणेश जी की गुफा में
धार्मिक मान्यता है कि माना गांव में महर्षि वेदव्यास जी की गुफा है। इस गुफा के समीप भगवान गणेश जी की गुफा है। मान्यता है कि इसी गुफा में महाभारत की रचना की गई थी। उस वक्त व्यास जी ने मौखिक रूप से जानकारी दी थी, जिसे गणेश जी ने लिखा था। धार्मिक मान्यता यह भी है कि उत्तराखंड में स्थित पांडुकेश्वर तीर्थ स्थल पर राज त्याग के बाद महाराज पांडु अपनी धर्म पत्नियों के साथ यहां निवास करते थे।
पांचों पांडवों का जन्म भी
इसी स्थान पर पांचों पांडवों का जन्म भी हुआ था। इसके लिए माणा गांव का विशेष महत्व है। यहां की मिट्टी आलू की खेती के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है। जौ और थापर (इसका आटा बनता है) भी अन्य प्रमुख फसलों में हैं। इनके अलावा यहां भोजपत्र भी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।












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