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उत्तराखंड में अब काउंटिंग के लिए काउंडाउन शुरू, भाजपा में नजर आ रही बेचैनी, जानिए क्यों

भाजपा में दिल्ली से देहरादून तक जारी है भागदौड़

देहरादून, 2 मार्च। उत्तराखंड में अब काउंटिंग के लिए काउंडाउन शुरू हो गया है। 10 मार्च को विधानसभा चुनाव के परिणाम आने वाले हैं। इससे पहले भाजपा में सबसे ज्यादा बेचैनी नजर आ रही है। इस बीच भाजपा के शीषे नेताओं की दिल्ली दौड़ जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक बार फिर केन्द्रीय नेतृत्व से मिलने दिल्ली पहुंचे हैं। जिसके सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं।

 Countdown for counting now started in Uttarakhand, uneasiness seen in BJP, know why

10 मार्च को आने हैं परिणाम
विधानसभा चुनाव के परिणाम 10 मार्च को आने हैं। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल अपनी-अपनी ​जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं। कांग्रेस जहां सरकार को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त होने के साथ ही स्पष्ट बहुमत लाने का दावा कर रही है। वहीं भाजपा के अंदर भितरघात जैसे गंभीर आरोप लगने के बाद बेचैनी नजर आ रही है। पार्टी शीर्ष नेतृत्व से लेकर प्रदेश स्तर के नेताओं में ये बेचैनी साफ देखी जा सकती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार प्रदेश के बड़े नेताओं से मिलकर फील्डिंग जमाने में लगे हैं। प​​हले पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक फिर त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों से मिलकर धामी माहौल बनाने में जुटे हैं। इसके साथ ही दिल्ली जाकर हाईकमान को भी फीडबैक दे चुके हैं। इस बीच पार्टी के अंदर भितरघात को लेकर आई शिकायतों का संज्ञान लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को दिल्ली तलब कर सारी स्थि​ति की समीक्षा की है। इसके बाद अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक बार फिर केन्द्रीय नेतृत्व से मिल कर अपना पक्ष भी रख रहे हैं। साथ ही सरकार बनाने को लेकर होने वाले सभी समीकरणों पर भी बात होने की उम्मीद लगाई जा रही है।
धामी की दिल्ली दौड़, तलाशे जा रहे सियासी मायने
इधर धामी के दिल्ली दौड़ से प्रदेश में सियासत गरमा गई है। भाजपा में पहले ही प्रदेश स्तर के संगठन में बदलाव के संके​त मिल रहे हैं। सत्ता में आने या न आने दोनों विकल्पों के बाद भी प्रदेश स्तर के संगठन में बदलाव तय माना जा रहा है। 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पार्टी किसी भी स्तर पर चूक नहीं होने देना चाहती है। इसके लिए जल्द ही प्रदेश स्तर पर बदलाव होने के संकेत मिल रहे हैं। जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और त्रिवेंद्र सिंह रावत का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। भाजपा इन दोनों नेताओं में से किसी एक को प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी सौंप सकती है। जो कि लोकसभा चुनाव तक भाजपा को मजबूत करने की दिशा में काम करने की रणनीति पर फोकस कर सकते हैं। इस समय भाजपा में प्रदेश स्तर के सीनियर नेताओं की केन्द्र में कोई भूमिका नहीं है। निशंक केन्द्रीय शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी निभा चूके हैं। चुनाव में निशंक को घोषणा पत्र बनाने का जिम्मा सौंपा गया, जबकि ​त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चुनाव न लड़कर पार्टी के बागी को मनाने और दूसरे प्रत्याशियों के लिए प्रचार-प्रसार किया। इस तरह दोनों ही प्रदेश संगठन में अपनी जिम्मेदारी को निभाने के लिए तैयार दिख रहे हैं। जो कि 10 मार्च के बाद तय माना जा रहा है।

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