केदारनाथ में थार को लेकर विवाद,वीडियो वायरल से मचा बवाल, मुख्य सचिव ने दिए जांच के आदेश
केदारनाथ धाम में दिव्यांगों और असहाय लोगों की सहायता के लिए पहुंचाई गई थार गाड़ियों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें कुछ लोग थार से उतरकर मंदिर की तरफ जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इतना ही नहीं ये लोग अच्छे परिवार के ओर सामान्य तरीके से उतरते हुए दिखाई दिए।

जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया। लोगों ने सोशल मीडिया में इसको लेकर आपत्ति दर्ज कराई। विवाद बढ़ता देख मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने जिलाधिकारी सौरभ गेरहवाल को इस पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। इस बीच सोशल मीडिया में ये भी दावा किया जा रहा है कि जो परिवार थार से उतर रहा है, वह कोई वीआईपी परिवार से जुड़े लोग हैं। हालांकि इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है।
बता दें कि कुछ दिनों पहले ही सेना के हेलीकॉप्टर चिनूक से दो थार गाड़ियां पहुंचाई गई थीं। प्रशासन का दावा था कि ये गाड़ियां दिव्यांग, असहाय और मरीजों को लाने और ले जाने के लिए लाई गई हैं। हालांकि तब भी धाम में थार गाड़ी ले जाने को लेकर काफी विवाद हो चुका है। अब वीडियो में थार गाड़ी से कुछ परिवारों को आवाजाही करवाई जा रही है। जिससे लोग सवाल खड़े कर रहे हैं कि ये गाड़ी दिव्यांग, असहाय लोगों के लिए है, या फिर वीआईपी लोगों के लिए।
पूरे प्रकरण ने जैसे ही तूल पकड़ा तो मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने जिलाधिकारी सौरभ गेरहवाल को इस पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। इस बीच शासन प्रशासन की ओर से दावा किया जा रहा है कि स्वास्थ्य आपातकाल में महिंद्रा थार काफी मददगार साबित हो रही है। स्वास्थ्य एवं अन्य आपातकाल स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए पर्यटन विभाग की ओर से दो एसयूवी थार केदारनाथ धाम में पहुंचाए गए हैं। जो ऐसी आपात स्थिति में बेहद मददगार साबित हो रहीं हैं।
प्रतिदिन कई लोगों को इनसे त्वरित मदद पहुंचाई जा रही है। सहायक अभियंता सिविल वृत्त डीडीएमए मनीष डोगरा ने कहा कि केदारनाथ पहुंचने पर किसी श्रद्धालुओं के साथ कोई आपातकाल दुर्घटना, बीमार होने, असहाय लोगों या अन्य किसी आपातकाल स्थिति होने पर त्वरित कार्रवाई के लिए पर्यटन विभाग की ओर से दो एसयूवी थार गाड़ियों की स्वीकृति मिली थी। दोनों गाड़ियां केदारनाथ धाम में पहुंचाई गई हैं।
हर दिन दो से तीन स्वास्थ एवं अन्य आपातकाल स्थिति में इन गाड़ियों का प्रयोग किया जा रहा है। गाड़ियां पहुंचने के बाद से ऐसे रेस्क्यू अभियान सहूलियत एवं तेजी के साथ हो रहे हैं। जबकि पहले सुरक्षाबलों को किसी का स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पहुंचाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी।












Click it and Unblock the Notifications