उत्तराखंड भाजपा में विधायकों और सीनियर नेताओं का विवाद बढ़ा, प्रदेश नेतृत्व ने किए तलब
उत्तराखंड में भाजपा ने अपने ऐसे विधायकों और सीनियर नेताओं को तलब किया है जो कि पिछले दिनों से बयान या विवाद की वजह से पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर चुके हैं। इसमें दो विधायक, एक पूर्व विधायक, एक दायित्वधारी और एक कार्यकारिणी सदस्य शामिल हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट खुद सभी से वन टू वन बात कर सभी मसलों पर बातचीत करेंगे। भाजपा निकाय चुनाव से पहले इन सभी मुद्दों का समाधान कर डेमेज कंट्रोल में जुटी है।

उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव निपटते ही भाजपा के अंदर बयानबाजी और नए विवाद खड़े हो रहे हैं। टिहरी के विधायक किशोर उपाध्याय ने पत्र के जरिये पूर्व विधायक दिनेश धनै पर निशाना साधा कि उन्होंने टीएचडीसी की एक बैठक में उन पर उनकी सिफारिश पर उनके समर्थकों को ठेके दिए जाने का आरोप लगाया है। पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद धनै ने भी किशोर पर निशाना साधा।
जिसके बाद से पार्टी मुश्किल में पड़ गई है। विपक्ष को भी इससे राजनीति करने का मौका मिल गया है। दूसरा विवाद रानीखेत विधायक प्रमोद नैनवाल और उत्तराखंड राज्य सलाहकार श्रम संविदा बोर्ड के अध्यक्ष कैलाश पंत के बीच हुआ। इस प्रकरण में भतरौंजखान के प्रधान संदीप खुल्बे ने विधायक नैनावाल के भाई सतीश नैनवाल और भांजे संदीप बधानी पर मारपीट का आरोप लगाया और पुलिस में तहरीर दे दी।
कैलाश पंत प्रधान के समर्थन में आ गए। जिसके बाद भाजपा में अपने ही विधायक, सीनियर नेता आमने सामने आ गए। इसके बाद से पार्टी असहज हो गई। इस के साथ ही पार्टी ने कार्यकारिणी सदस्य खेम सिंह चौहान को भी तलब किया है। चौहान पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया में पार्टी विरोधी टिप्पणी की।
मई से जून में उत्तराखंड में निकाय चुनाव होने हैं। जिसको लेकर भाजपा अभी से इस तरह के विवाद में नहीं पड़ना चाहती है। साथ ही लोकसभा चुनाव से पहले जो भाजपा ने दूसरे दलों से अपने पाले में लाकर करीब 15 हजार लोगों को जोड़ा उससे पार्टी के अंदर किसी तरह का विवाद न हो। इसको लेकर पार्टी अभी से डेमेज कंट्रोल में जुट गई है।












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