स्वामी दयानंद सरस्वती को सीएम पुष्कर सिंह धामी ने किया नमन, जानिये क्या कहा?
स्वामी दयानंद सरस्वती की आज 200वीं जयंती पर मनाई जा रही है। इस मौके पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ट्विट करते हुए उन्हें याद किया।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने लिखा, 'प्रसिद्ध समाज सुधारक, आध्यात्मिक चिंतक एवं आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती पर कोटिशः नमन। ज्ञान, संस्कृति एवं आधुनिकता का समन्वय बनाते हुए सामाजिक उत्थान हेतु आपके द्वारा दिया गया योगदान अविस्मरणीय है।'

कौन थे दयानंद सरस्वती जी?
स्वामी दयानंद आर्य समाज के संस्थापक, आधुनिक भारत के महान चिंतक, समाज-सुधारक और देशभक्त थे। महर्षि दयानन्द सरस्वती का जन्म 12 फरवरी 1824 को टंकारा (गुजरात) में हुआ था | वे सन् 1847 में घूमते-घूमते नर्मदा तट पर स्थित स्वामी पूर्णानंद सरस्वती के आश्रम में जा पहुंचे और उनसे 24 वर्ष, 2 माह की आयु में 'संन्यास-व्रत' की दीक्षा ले ली। 'संन्यास-दीक्षा' लेने के उपरांत उन्हें एक नया नाम, 'दयानंद सरस्वती' दिया गया।
उन्होंने 1875 में आर्य समाज की नींव रखी थी। दयानन्द सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना एक उद्देश्य को लेकर की थी। दयानन्द सरस्वतीके दर्शन, नीति पर आधारित हैं, जिन्हें कृनवंतो विश्वामरीम के नाम से भी जाना जाता है, जो लोगों को हर तरफ फैलने के लिए अधिकतम सहायता प्रदान करने के लिए है। आर्य समाज को सत्यार्थ प्रकाश पर आधारित अपने सिद्धांत के साथ उच्च सम्मान में रखा गया है जिसका शाब्दिक अर्थ है सत्य का प्रकाश ' है। आर्य समाज - मानव जाति के लिए स्वामी दयानंद का एक अनूठा निर्देशन है। उन्होंने आर्य समाज के द्वारा ही उन्होंने बाल विवाह, सती प्रथा जैसी कुरीतियों को दूर करने और शिक्षा को बढ़ावा देने का काम किया। स्वामी दयानंद सरस्वती जी का देहांत सन् 1883 को दीपावली के दिन संध्या के समय हुआ था |












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