सिधु जल संधि पर रोक पाकिस्तान को करारा जवाब, भारत हर एक आतंकी हमले का मुँहतोड़ जवाब देने का तैयार: CM धामी
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि भारत सरकार ने सिंधु जल संधि पर रोक लगाकर पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उठाए गए ये साहसिक कदम न केवल आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति पर मुहर लगाते हैं।
इससे दुश्मनों को भी यह स्पष्ट संदेश गया है कि भारत हर एक आतंकी हमले का मुँहतोड़ जवाब देने का तैयार है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की सिंधु जल संधि पर रोक लगाकर साफ कर दिया है कि अब खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।

इस निर्णायक फैसले से आतंक को पनाह और बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान के मंसूबे चकनाचूर होंगे। इसी तरह अटारी बॉर्डर चेक पोस्ट को बंद करने सहित अन्य फैसलों से भी पाकिस्तान को कड़ा संदेश गया है। धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल एवं निर्णायक नेतृत्व में हुई सीसीएस बैठक में आतंकवाद के खिलाफ लिए गए ऐतिहासिक और कठोर निर्णय पर अब कार्रवाई प्रारंभ हो चुकी है।
बता दें कि जम्मू कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले में आतंकियों ने 28 लोगों की जान ले ली थी, जिसके बाद से केंद्र सरकार पर कठोर कार्रवाई की मांग उठ रही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुए फैसले में 1960 में हुई सिंधु जल समझौते को रद्द करने का फैसला लिया गया है। भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद दोनों देशों की पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए यह समझौता किया गया था।
19 सितंबर, 1960 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत छह नदियों ब्यास, रावी, सतलुज, सिंधु, चिनाब और झेलम के पानी के इस्तेमाल को लेकर नियम तय किए गए थे। इस समझौते के तहत पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों चिनाब, झेलम और सिंधु से संपूर्ण जल प्राप्त होता है। वहीं भारत को सतलुज, व्यास और रावी नदियों का जल प्राप्त होता है।












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