उत्तराखंड बॉर्डर पर दिखा चाइनीज विमान, निपटने के लिए ये काम कर रहे ITBP के जवान

पिथौरागढ़। उत्तराखंड की चीन से लगती सीमा पर भी खतरा मंडराने लगा है। यहां पिथौरागढ़ के सीमावर्ती क्षेत्र धारचूला से लिपुलेख तक के इलाके में भारत-नेपाल के बीच तनाव व्याप्त है। नेपाल की आड़ में ही चीनी सेना सक्रिय हो चुकी है। संवाददाता ने बताया कि, लद्दाख क्षेत्र में जारी तनातनी के दरम्यान अब चीन ने पिथौरागढ़ से लगती सीमा पर भी सैन्य गतिविधि बढ़ा दी हैं।

सेना-आईटीबीपी के जवान जुटे

सेना-आईटीबीपी के जवान जुटे

बीते कल की रात चीन के मानव रहित विमान (यूएवी) बॉर्डर एरिया में नजर आए। इधर, हमारी सीमा में भारतीय थल सेना और आइटीबीपी के जवान गश्ती कर रहे हैं। अनहोनी की आशंका में सीमावर्ती ग्रामीण भी जवानों की मदद को रात के समय जागे रहते हैं। स्थानीय स्तर पर लोगों में ​चीनी गतिविधियों की चर्चा होती रहती हैं।

मीडिया के आने-जाने पर रोक

मीडिया के आने-जाने पर रोक

खास बात यह है कि, चीन ने पहली बार पिथौरागढ़ सीमा पर मानव रहित विमान से टोह ली है। कुछ भी भ्रम न फैले, इसलिए भारतीय सुरक्षाबलों द्वारा आज छियालेख से आगे जाने पर रोक लगा दी गई है। यह रोक मीडिया पर भी लागू है। हालांकि, गांववालों को रास्ते से निकलने दिया जाता है।

रात के समय आया था यूएवी?

रात के समय आया था यूएवी?

एक ग्रामीण ने बताया कि, बुधवार रात अचानक तेज रोशनी हुई, जो उठते हुए ऊंचाई तक आई और पूरे सीमा क्षेत्र का चक्कर लगाती रही। रात आठ से नौ बजे तक इस गतिविधि को देख सेना और आइटीबीपी के जवान अलर्ट हो गए। ऐसा बताया जा रहा है कि, वो रोशनी किसी मानव रहित टोही विमान की थी। चीन ने हाल के क्षेत्र में लिपुलेख सीमा के पास अपनी सैन्य गतिविधि बढ़ाई हैं, ऐसे में इसे उसी का हिस्सा माना जा रहा है।

कैलाश के पास चीन की मिसाइलें तैनात

कैलाश के पास चीन की मिसाइलें तैनात

एक अधिकारी के हवाले से बताया गया कि, कैलाश मानसरोवर के पास पाला चीन का गांव है, जहां उसने स्थायी सैन्य छावनी का निर्माण कर मिसाइल तैनात कर दी हैं। वहीं, भारतीय सेना की मूवमेंट भी लिपुलेख व लिम्पिया-धुरा इलाके में बढ़ गई हैं। जवान अपने खच्चरों के साथ रास्तों से निकलते दिख जाते हैं। गांववाले उन्हें सलामी देते हैं।

एसएसबी ने भी गश्ती बढ़ाई

एसएसबी ने भी गश्ती बढ़ाई

लिपुलेख से लेकर मुनस्यारी के मल्ला जोहार से लगने वाली सीमा पर चौकसी बढ़ा दी गई है। इस क्षेत्र में आइटीबीपी की तीन वाहिनियां अभी कार्यरत हैं। नाबीढांग से आगे किसी को प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। छियालेख में भी इनर लाइन से आगे स्थानीय ग्रामीणों के अलावा अन्य के प्रवेश पर रोक है। नेपाल सीमा पर भी एसएसबी ने गश्त तेज कर दी हैं।

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