भाजपा ने हार पहनकर शुरू किया अपना प्रचार तो कांग्रेस के दिग्गजों ने आरोपों से किया प्रहार, जानिए क्या है मामला
कृषि कानून को वापस लेने के फैसले और यूपी के 21 साल से परिसंपत्तियों के बंटवारे के बाद भाजपा को मिली चुनाव से पहले संजीवनी
देहरादून, 20 नवंबर। चुनावी साल में भाजपा को दो बड़े मुद्दों पर राजनीतिक जीत मिल गई है। कृषि कानून को वापस लेने के फैसले और यूपी के 21 साल से परिसंपत्तियों के बंटवारे के बाद भाजपा को चुनाव से पहले संजीवनी मिल गई है। इससे भाजपा अब चुनाव में जाने से पहले इन मुद्दों को पूरी तरह से कैश करने की कोशिश में जुट गई है। शनिवार को देहरादून लौटने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भाजपा ने जोरदार तरीके से स्वागत किया और रोड शो कर शक्तिप्रदर्शन भी किया।

किसानों की नाराजगी से परेशान थी भाजपा
कृषि कानूनों को वापस लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड में भाजपा को राहत दे दी है। किसानों की नाराजगी की वजह से भाजपा तराई क्षेत्र में खुलकर बैटिंग नहीं कर पा रही थी। पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य का बेटे के संग कांग्रेस में वापस जाने की वजह भी किसानों की नाराजगी मानी गई। यशपाल आर्य बाजपुर सुरक्षित सीट से विधायक रहे हैं। इस सीट पर किसानों का अच्छा खासा वोटबैंक है। यशपाल आर्य को अपनी सीट पर किसानों की नाराजगी का फेक्टर भी मजबूत दिख रहा था। जिस वजह से यशपाल आर्य ने चुनाव में जाने से पहले ही कांग्रेस का दामन थाम लिया। लेकिन अब भाजपा ने काफी हद तक डेमेज कंट्रोल कर लिया है। जिसका लाभ चुनाव में भाजपा को मिल सकता है। ऐसे में भाजपा अब जनता के बीच नए मैसेज के साथ जाने की रणनीति पर काम कर रही है। जिनमें कृषि कानूनों को वापस लेने और परिसंपत्तियों के बंटवारा का मामला भी शामिल है। हालांकि कांग्रेस अब भी किसानों की नाराजगी की बात कर रही है। और चुनाव तक किसानों की समस्याओं को उठाने की कोशिश में जुटी है।
कांग्रेस के दिग्गजों ने भाजपा पर किया प्रहार
चुनावी साल में कांग्रेस किसी भी मुद्दे पर भाजपा को हावी नहीं होने देना चाहती है। ऐसे में कांग्रेस परिसंपत्तियों के बंटवारे के मामले में भाजपा को अब भी घेरने में जुटी है। कांग्रेस की और से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने एक साथ अपने तरकश से बाण छोड़े। कृषि कानून पर कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा निरस्त किए गए तीनों कृषि कानूनों पर कहा कि प्रधानमंत्री को मजबूरन यह कानून वापस लेने पड़े हैं। इसका कारण हमारी पार्टी का दबाव और किसानों का एकत्रीकरण है जिसके कारण सरकार को अपने कदम पीछे हटाने पड़े हैं। परिसंपत्तियों के बंटवारे पर प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बताएं कि उन्होंने किसके दबाव में उत्तर प्रदेश के साथ समझौता किया है, यह समझौता नहीं वरन उत्तराखंड के सम्मान को गिरवी रखना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को यह अधिकार नहीं है कि वह भविष्य का भी समझौता कर लें। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि जिन परिसंपत्तियों के बंटवारे का पुष्कर सिंह धामी और उनकी सरकार बखान कर रही है, वह पूरी तरह भ्रामक है। सच तो यह है कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी योगी के सामने बौने साबित हुए हैं। हरीश रावत ने कहा कि यह संपत्तियों का बंटवारा नहीं केवल उत्तर प्रदेश के सामने उत्तराखंड का समर्पण है। नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि पुष्कर धामी सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है। इनकी कमजोरियों का हम सदन में विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि परिसंपत्ति विवाद मामले को हम सदन में उठाएंगे और यह पूछेंगे कि किसके दबाव में उन्होंने यह समझौता किया है।












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