उत्तराखंड में नए सीएम को लेकर भाजपा का होमवर्क पूरा, धामी और कौशिक को दिल्ली बुलाकर दिए संकेत
दिल्ली में चला बैठकों का दौर, धामी भी रहे मौजूद
देहरादून, 15 मार्च। उत्तराखंड में प्रचंड बहुमत की सरकार बनने के बाद भी नए मुखिया को लेकर इंतजार लंबा होता जा रहा है। इस बीच देहरादून से लेकर दिल्ली तक भाजपा में अचानक सियासी पारा चढ़ चुका है। मंगलवार को कार्यवाहक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक को दिल्ली बुला लिया गया। जिनकी राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर केन्द्रीय नेतृत्व के साथ नए सीएम और सरकार को लेकर मंथन हुआ है। ऐसे में अब नए सीएम के नाम पर मुहर लगना तय माना जा रहा है। हालांकि नाम का ऐलान विधानमंडल दल की बैठक के बाद ही होना है।

दिल्ली में चला बैठकों का दौर
मंगलवार को कार्यवाहक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी की गृह मंत्री अमित शाह की दिल्ली में बैठक हुई है। इस बैठक के बाद उत्तराखंड में नए समीकरणों को लेकर फिर से सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। धामी को प्रदेश में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने का दावा किया जा रहा है। जिसमें मुख्यमंत्री बनाने के अलावा दूसरे विकल्प पर भी बात होने का दावा किया जा रहा है।
राजनाथ बताएंगे हाईकमान का फरमान
प्रदेश में भाजपा ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। राजनाथ सिंह को पर्यवेक्षक बनाने को लेकर भी कई तरह की चर्चांए उत्तराखंड में सामने आने लगी है। राजनाथ सिंह का उत्तराखंड से पुराना नाता रहा है। प्रभारी के तौर पर राजनाथ सिंह कई बार उत्तराखंड की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके साथ ही उत्तराखंड के नेताओं के साथ राजनाथ का गहरा नाता है। राजनाथ सिंह को पर्यवेक्षक बनाकर भाजपा ने साफ संकेत दिए हैं। हालांकि माना जा रहा है कि हाईकमान ने नाम तय कर दिए हैं सिर्फ औपचारिकता ही बची है। मंगलवार को भी देहरादून से लेकर दिल्ली तक धामी समेत कई नाम रेस में बताए जा रहे हैं। जिनमें पुष्कर सिंंह धामी, सतपाल महाराज, धन सिंह रावत, ऋतु खंडूरी भूषण, अजय भट्ट और रमेश पोखरियाल निशंक का ही नाम लिया जा रहा है। हालांकि मंगलवार को ये भी दावा किया गया कि भाजपा हाईकमान ने विधायकों में से ही किसी एक नाम पर सहमति बनाने के संकेत दिए हैं। पार्टी हाईकमान इस समय 2024 का लोकसभा चुनाव को देखते हुए भी सीएम के नाम पर मुहर लगाएगी। ऐसे में सभी समीकरणों को साधने की कोशिश की जा रही है। जिस तरह से महिलाओं ने प्रदेश में भाजपा को सपोर्ट किया और कांग्रेस ने लड़की हूं लड़ सकती हूं का नारा दिया। इसे काउंटर करने के लिए पहली बार प्रदेश को महिला मुख्यमंत्री देने के दावे पर ज्यादा दांव खेला जा रहा है। जो कि होली के बाद ही साफ हो पाएगा।












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