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AIIMS Rishikesh में बड़ी राहत, एंडोवेस्कुलर न्यूरोइंटरवेंशन शुरू,आयुष्मान भारत योजना में मिल रहा निशुल्क इलाज

एम्स ऋषिकेश में अब उच्च तकनीकी वाले एंडोवेस्कुलर न्यूरोइंटरवेंशन शुरू हो गया है। एम्स दिल्ली व पीजीआइ चंडीगढ़ की तरह एम्स ऋषिकेश में भी ब्रेन व स्पाइन की खून की नसों से संबंधित बीमारियों का बिना चीरफाड़ के उपचार होगा। खास बात ये है कि आयुष्मान भारत योजना में निशुल्क इलाज मिल रहा है।

एम्स,ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह के निर्देशन में संस्थान के इंटरवेंशन रेडियोलॉजी विभाग में उच्च तकनीकी वाले न्यूरो इंटरवेंशन जैसे कैरोटिड स्टेंटिंग (खून की नस में सिकुड़न ) ए.वी.एम व ए.वी.एफ( खून की नसों का गुच्छा) , स्ट्रोक (लकवा) एन्यूरिजम (खून की नसों का गुब्बारा व नसों का फटना) समेत कई अन्य तरह की बीमारियों का बिना किसी चीरफाड़ के इलाज उपलब्ध है।

Big relief AIIMS Rishikesh endovascular neurointervention started free treatment Ayushman Bharat

संस्थान में यह कार्य दिल्ली एम्स से प्रशिक्षित एवं वर्तमान में एम्स ऋषिकेश के इंटरवेंशन रेडियोलॉजी विभाग (भूतल बी- ब्लॉक) में कार्यरत सहायक आचार्य डॉ. बी.डी. चारण (डी.एम. न्यूरोइंटरवेंशन) द्वारा मरीजों में इस तरह की बीमारियों के उपचार को अंजाम दिया जा रहा है।

विषय विशेषज्ञ डॉ. बी.डी. चारण ने बताया कि विभाग की डीएसए लैब (पांचवीं मंजिल ) में उपचार की यह प्रक्रिया एनेस्थीसिया विभाग के सहयोग से संपन्न की जाती है, जिसमें अन्य विभागों जैसे जेरियाट्रिक मेडिसिन, ईएनटी, नेत्र विभाग, न्यूरोसाइंस व मेडिसिन आदि का भी योगदान रहता है।

क्या है इस उपचार की प्रक्रिया विधि
डॉ. चारण के मुताबिक इस विधि के तहत जांघ की खून की नस में 2 एमएम का पाइप डालकर ब्रेन तक पहुंच बनाई जाती है, उसके बाद बीमारी का बिना चीरफाड़ किए इलाज किया जाता है। उन्होंने बताया कि चूंकि इस उपचार में चीरफाड़ नहीं किया जाता है, लिहाजा मरीज को अस्पताल अथवा आईसीयू में निहायत कम समय तक ही रुकना पड़ता है और मरीज की जल्दी छुट्टी कर दी जाती है।

प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह, कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ, एम्स ऋषिकेश का बयान

अस्पताल में मरीजों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने को संस्थान प्रतिबद्ध है। जिसके तहत संस्थागत स्तर पर लगातार स्वास्थ्य सुविधाओं को विस्तार दिया जा रहा है। जिससे उत्तराखंड व समीपवर्ती राज्यों के मरीजों को गंभीर श्रेणी के इलाज के लिए अन्यत्र परेशान नहीं होना पड़े।

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