सावधान! वर्क फ्रॉम होम से कमाने का लालच, टेलीग्राम से ऐसे चल रहा इंटरनेशनल फ्रॉड गिरोह,अगला नंबर आपका तो नहीं
उत्तराखंड एसटीएफ ने करोड़ों चीनी निवेश घोटाले का भंडाफोड़ किया है। भारत वर्ष में ऑनलाईन वर्क फ्रॉम होम के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले एक गिरोह के सरगना सहित 03 सदस्यों को गुड़गांव हरियाणा से गिरफ्तार किया है। गिरोह ने देहरादून की सरस्वती विहार निवासी एक महिला पीडित के साथ 21 लाख रुपये से अधिक की धोखाधडी की।
जो कि व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से दुबई में बैठे अन्तराष्ट्रीय साईबर गिरोह के सम्पर्क में रहकर उनके इशारे पर भारत में ठगी का काम करते थे। गिरोह द्वारा टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से Harvey Norman आदि जानी मानी विभिन्न विदेशी कम्पनियों के अधिकारी/कर्मचारी बताकर विभिन्न फर्जी वैबसाइटों में रजिस्ट्रेशन करवाकर टास्क देकर ट्रेडिंग एवं ट्रेडिंग हेतु खुलवाये गये एकाउण्ट को रिचार्ज कराने आदि के नाम पर धनराशि जमा करायी जाती थी।

एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आयुष अग्रवाल ने बताया कि दून की पीड़िता को टेलीग्राम एप्प के माध्यम से मैसेज आया था। जिसमें उसे घर बैठे पैसे कमाने का लालच दिया गया। इसके बाद उसे एक ग्रुप में जोड़ा गया। ग्रुप से उसे एक वेबसाईट https://www.hvnorman-search1.net पर रजिस्ट्रेशन कराकर एकाउण्ट बनवाया गया। जहां वर्क फ्रॉम होम के नाम पर मिले टास्क को वेबसाईट में अपने एकाउण्ट में जाकर पूरा करना होता था। टास्क पूरे करने पर कम्पनी द्वारा उसे 2500 रूपये उसके यूनियन बैंक के अकाउन्ट पर प्राप्त हो गये।
इसके बाद टास्क शुरू होने पर उसे फेडरल बैंक के खाता में 10 हजार 500 रूपए जमा करने को कहा गया। साईबर ठगों द्वारा स्वयं को Harvey Norman नाम की कम्पनी का अधिकारी/कर्मचारी बताकर उसे ऑनलाईन वर्क फ्राम होम से कम समय मे अच्छा लाभ कमाने का प्रलोभन देकर उसके साथ 21,19,371/- रुपये की साईबर ठगी की जा चुकी है। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की टीम ने पड़ताल के बाद तीन अभियुक्त गण प्रथम शौकीन पुत्र अतुल शौकीन उम्र-24 वर्ष, सुभाष शर्मा पुत्र अनुप चन्द्र शर्मा उम्र-25 वर्ष व मुकुल गोधारा पुत्र कुलदीप गोधारा उम्र-20 वर्ष को गिरफ्तार किया गया। जो कि पीड़ितों को एक फर्जी वेबसाइट पर पंजीकरण करने और खाता खोलने के लिए कहा गया।
ट्रेडिंग से संबंधित वर्क-फ्रॉम-होम कार्यों के नाम पर उन्हें विभिन्न कार्य दिए गए। इन कार्यों को पूरा करने पर, पीड़ितों द्वारा जमा की गई राशि को वेबसाइट पर मुनाफे के साथ दिखाया गया, जिससे वे लालच में आकर और अधिक धनराशि जमा कराने के लिए प्रेरित हो गए। इस प्रकार, धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया। धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि को बिनेंस ऐप और ट्रस्ट वॉलेट के माध्यम से USDT क्रिप्टोकरेंसी खातों में स्थानांतरित किया गया, जिसमें विदेशों में स्थित साइबर ठगों की मदद ली गई। इसके बाद लाभांश के रूप में प्राप्त मुनाफे को अभियुक्तों के बीच बांट लिया गया।












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