दिल्ली से लौटते ही पूर्व सीएम हरीश रावत के तेवर पड़े नरम, पहले बगावत के संकेत अब माफी, जानिए क्यों आया बदलाव

दिल्ली से लौटते ही पूर्व सीएम हरीश रावत के तेवर पड़े नरम, पहले बगावत के संकेत अब मांगी माफी

देहरादून, 27 दिसंबर। दिल्ली से लौटते ही पूर्व सीएम हरीश रावत के तेवर नरम पड़ गए हैं। जिस तरह हरीश रावत ने अपने सोशल मीडिया के जरिए हाईकमान से संगठन के खिलाफ ही मोर्चा खोला था। उस तरह के व्यवहार में हरीश रावत बदलाव लाने में जुटे हैं। इसके पीछे की वजह हाईकमान की और से दिए गए निर्देश बताए जा रहे हैं। जिस तरह हरीश रावत ने चुनाव को लीड करने का दावा किया था, उसको लेकर खुद हरीश रावत को सफाई देनी पड़ी है। साथ ही हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस के अंदर चल रही खेमेबाजी को भी समझ रहे हैं। अगर चुनाव से पहले कांग्रेस में बगावत हुई तो हरदा की राजनीति पर सवाल खड़े होने तय हैं। पंजाब की राजनीति में हुए उथलपुथल के लिए भी हरीश रावत विपक्ष ही नहीं कांग्रेसियों के निशाने पर आ चुके हैं। ऐसे में हरीश रावत दोबारा ये गलती नहीं करना चाहेंगे।

As soon as he returned from Delhi, the attitude of former CM Harish Rawat softened, first signs of rebellion, now sorry, know why the change came

देहरादून आकर कहा, मेरे नेेतृत्व में ही लड़ा जाएगा

शनिवार को दिल्ली से देहरादून पहुंचने पर पूर्व सीएम और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष हरीश रावत का उत्तराखंड बॉर्डर से लेकर कांग्रेस मुख्यालय भवन में ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ स्वागत किया गया था। इस दौरान हरीश रावत ने दोहराया कि 2022 का विधानसभा चुनाव उनके नेेतृत्व में ही लड़ा जाएगा और सभी इसमें सहयोग करेंगे। हरीश रावत ने तर्क दिया कि हाईकमान की ओर से चुनाव अभियान समिति का चेयरमैन बनाया गया था, लेकिन अस्पष्ट सी स्थिति थी। कैंपेन कमेटी को लेकर मेरा क्या दायित्व है, इसे सब अपने-अपने तरीके से परिभाषित कर रहे थे। यह भी सत्य है कि इस कारण अभियान में सब लोग मुझसे नहीं जुड़ पा रहे थे, या मैं उन्हें अपने साथ नहीं जोड़ पा रहा था, लेकिन सबका जुड़ना चुनाव अभियान की सफलता के लिए आवश्यक है। हरीश रावत ने मीडिया में दिए इस बयान के लिए अगले ही दिन माफी मांगी। उन्होंने लिखा है कि

कल प्रेस वार्ता में थोड़ी गलती हो गई, मेरे नेतृत्व शब्द से अहंकार झलकता है। चुनाव मेरे नेतृत्व में नहीं, बल्कि मेरी अगुवाई में लड़ा जाएगा। मैं अपने उस घमंडपूर्ण उद्बोधन के लिए क्षमा चाहता हूं, मेरे मुंह से वह शब्द शोभा जनक नहीं है।

गुटबाजी रोकना बडा चेलेंज

हरीश रावत ने बीते दिनों में जिस तरह की प्रेशर पॉलिटिक्स की है, उससे ये संदेश जरुर गया है कि हाईकमान 2022 के चुनाव में हरीश रावत को बड़ा चेहरा मान रहा है। हालांकि पार्टी अपनी पुरानी परंपरा को नहीं तोड़ सकती और उन्हें सीएम फेस घोषित नहीं कर सकती, ऐसे में पार्टी ने उन्हें लीड करने के लिए कहा है। लेकिन इसमें लीड करने का मतलब सबका साथ भी होना जरुरी है। जिस तरह उत्तराखंड कांग्रेस दो गुटों में बंटी है, उससे आने वाले दिनों में कांग्रेस के लिए सबका साथ एक साथ नजर आना मुश्किल लग रहा है। जो चुनाव में दिखना तय है। हरीश रावत के लिए इस समय प्रदेश प्रभारी देवेन्‍द्र यादव, नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह, किशोर उपाध्‍याय और रंजीत रावत जैसे नेताओं को अपने साथ लाकर एकजुटता दिखाने का भी बडा चेलेंज हैा जो कि इतना आसान लगता नहीं हैा

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