12 साल से हक और सियासत के बीच फंसी 582 मलिन बस्तियां,जानिए क्यों वोट बैंक का बना मुद्दा,अब तक क्या हुआ
उत्तराखंड में धामी सरकार ने मलिन बस्तियों को अस्थायी राहत देने के लिए अध्यादेश को तीन साल और बढ़ा दिया है। 12 साल से मलिन बस्तियों को लेकर अब तक सरकारें कोई फैसला नहीं ले पाई है। सरकार में रहते सियासी दल इन्हें वोट बैंक मानकर राहत देती है। तो विपक्ष मालिकाना हक देने को लेकर आवाज उठाती है।
दिसंबर में प्रस्तावित निकाय चुनाव से पहले एक बार फिर ये मुद्दा गरमा गया है। भाजपा सरकार ने फिर से इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। जिससे तीन साल तक ये मामला फिर से शांत हो जाए। खास बात ये है कि इन बस्तियों में बिजली, पानी से लेकर सारी सुविधाएं सरकार की ओर से उपलब्ध हो रही है।

वोट बैंक की राजनीति के लिए बसाए
ऐसे में माना जाता है कि ये सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के लिए बसाए गए हैं। साल 2010 की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि मलिन बस्तियों में 55 फीसदी लोगों के पास पक्का मकान,29 फीसदी लोगों के पास आधा पक्का मकान और 16 फीसदी लोगों के पास कच्चा आवास था। 86 फीसदी घरों में बिजली कनेक्शन लगे मिले। 252 आंगनबाड़ी और प्री स्कूल 93 हेल्थ सेंटर भी मलिन बस्तियों में बने हुए थे। हालांकि ये रिपोर्ट 14 साल पुरानी है।
सिर्फ चुनाव आते ही सुध
इस लिहाज से अब मलिन बस्तियों के क्या हाल होंगे इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। समाजसेवी और एडवोकेट सुनीता प्रकाश का कहना है कि सालों से मलिन बस्तियों में रह रहे लोगों को वोट बैंक का जरिया बनाया जा रहा है। सरकार को चाहिए कि इन लोगों के लिए परमानेंट व्यवस्था की जाए। अगर मालिकाना हक देना है तो सरकार को इस पर फैसला लेना चाहिए नहीं तो इनको बसाने की पूरी योजना पर काम करना चाहिए। सिर्फ चुनाव आते ही मलिन बस्तियों को सुविधा या राहत देने की बात करना गलत है।
कब- कब क्या हुआ:-
- उत्तराखंड की नदियों को घेरे जाने के मामले को लेकर साल 2012 में एनजीटी ने सख्त रुख अपनाया
- नैनीताल हाईकोर्ट ने नदियों के किनारे बनी 582 मलिन बस्तियों के अतिक्रमण को हटाने के आदेश दिए
- साल 2016 में तात्कालिक कांग्रेस सरकार मलिन बस्तियों के नियमितीकरण को लेकर अध्यादेश लेकर आई
- राजपुर विधानसभा सीट से तात्कालिक विधायक राजकुमार की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई
- साल 2018 में नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए कि मलिन बस्तियों में रह रहे लोगों को वहां से हटाकर अन्य जगह पर पुनर्वासित किया जाए
- उत्तराखंड सरकार ने 17 अक्टूबर 2018 को तीन साल के लिए एक अध्यादेश जारी किया
- सरकार ने कहा कि 3 साल तक मलिन बस्तियों में रह रहे लोगों को हटाया नहीं जाएगा
- 21 अक्टूबर 2021 को एक बार फिर अध्यादेश के कार्यकाल को 3 साल के लिए बढ़ा दिया गया.
अब तक क्या कार्रवाई हुई
- देहरादून नगर निगम की टीम ने 27 अवैध बस्तियों में 500 से ज्यादा मकानों को तोड़ने के लिए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
- देहरादून नगर निगम, एसडीडीए और मसूरी नगर पालिक ने 504 नोटिस जारी किए थे
- देहरादून नगर निगम ने करीब 525 अवैध अतिक्रमण चिन्हित किए थे
- 89 लोगों पर नगर निगम ने नोटिस जारी किए
- 15 लोगों ने ही अपने साल 2016 से पहले के निवास के साक्ष्य दिए
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