संतान के लिए रात भर हाथ में जलता हुआ दीपक लेकर 177 दंपत्तियों ने किया अनुष्ठान,विदेशी जोड़ा भी हुआ शामिल
पौड़ी जिले के श्रीनगर स्थित कमलेश्वर महादेव मंदिर में बैकुंठ चतुर्दशी पर्व पर निसंतान दंपत्तियों ने रात भर हाथ में दीया लेकर भगवान शिव का जप करते हुए संतान फल प्राप्ति की कामना की। दंपत्ति रात भर हाथ में जलता हुआ दीपक लेकर भगवान शिव का जप करते रहे।
खड़ा दीया अनुष्ठान के नाम से प्रचलित आस्था के इस यज्ञ में देश के विभिन्न राज्यों के 176 निःसंतान दंपत्तियों सहित एक विदेशी जोडे़ ने भी प्रतिभाग किया।

कमलेश्वर मंदिर में हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को निःसंतान दंपत्ति खड़ा दिया अनुष्ठान में शामिल होते हैं। पंरपरानुसार, गुरूवार को तय समय पर भगवान शिव की पूजा के साथ अनुष्ठान शुरू हुआ। आज शुक्रवार सुबह मुहूर्त के अनुसार, स्नान के बाद कमलेश्वर महादेव मंदिर के महंत आशुतोष पुरी ने भगवान शिव के आर्शीवाद के साथ पूजा संपन्न कराई।
महंत ने बताया कि अनुष्ठान के लिए कानपुर, चेन्नई, जयपुर, दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा और नोएडा सहित उत्तराखण्ड के विभिन्न स्थानों के साथ ही विदेशी दंपत्ति ने भी रजिस्ट्रेशन कराया था।
बैकुंठ चतुर्दशी पर गुरुवार को कमलेश्वर महादेव मंदिर में 177 दंपतियों ने खड़ा दीया अनुष्ठान किया। जिसमें संतान प्राप्ति के लिए पौलेंड के कपल ने भी ये परंपरा निभाई। पोलैंड से पहुंचे विदेशी दंपति क्लाऊडिया स्टेफन ने खड़ा दीया अनुष्ठान में भाग लिया। गुरुवार को गोधूलि बेला से यह अनुष्ठान शुरू हुआ, जो आज शुक्रवार सुबह तक चला।
इस बार खड़ा दीया अनुष्ठान के लिए 216 से ज्यादा दंपतियों ने पंजीकरण करवाया था। इसमें से 177 दंपतियों ने अनुष्ठान में हिस्सा लिया। मान्यता है कि रातभर हाथों में दीया लेकर खड़ा होने और आराधना करने पर संतान की प्राप्ति होती है। कमलेश्वर मंदिर में रुई की 365 बाती चढ़ाने की परंपरा को भी निभाया गया।
रुद्रप्रयाग में क्रौंच पर्वत पर विराजमान भगवान कार्तिक स्वामी के तीर्थ में दो दिवसीय बैकुंठ चतुर्दशी मेला आयोजित होता है। रात को कार्तिक स्वामी मंदिर परिसर में रातभर अखंड जागरण और कीर्तन भजनों का आयोजन हुआ। निसंतान दंपतियों की ओर से रातभर हाथों में प्रज्वलित दीप लेकर संतान प्राप्ति की कामना की जाती है।












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