Uttar Pradesh घोषित होगा सूखाग्रस्त ? 75 ज़िलों की टीमों की रिपोर्ट का योगी सरकार को है इंतजार

लखनऊ, 08 सितंबर: उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी 75 जिलाधिकारियों से बारिश की कमी के कारण वर्तमान खरीफ सीजन के दौरान धान की बुवाई और अन्य फसलों में कमी के बारे में रिपोर्ट मांगी है। सरकार के मुताबिक हालांकि खरीफ फसलों की बुवाई में केवल 10 प्रतिशत की कमी आई है जिसमें धान भी शामिल है। दूसरी ओर राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के अनुमान के अनुसार, धान की बुवाई में 60% से अधिक की संभावना जताई है। सूत्रों की माने तो सभी जिलों से रिपोर्ट आने के बाद सूखे की स्थिति का आकलन कर वास्तविक रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।

रिपोर्ट आने के बाद लिया जाएगा अंतिम निर्णय

रिपोर्ट आने के बाद लिया जाएगा अंतिम निर्णय

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा, ''मैं मानता हूँ कि वर्षा की कमी है। हमें उम्मीद है कि इस महीने के बाकी दिनों (सितंबर) में पर्याप्त बारिश होगी। राज्य सरकार ने सभी 75 जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है और रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद नियमों और मानकों के अनुसार उचित निर्णय लिया जाएगा।'' वहीं दूसरी ओर आईएमडी के अनुसार, अखिल भारतीय वर्षा अब तक सामान्य से अधिक है लेकिन पूर्वी भारत और उत्तर पूर्व में कमी है।

कई राज्यों में दर्ज की गई बारिश की कमी

कई राज्यों में दर्ज की गई बारिश की कमी

यूपी में वर्षा की कमी 44 फीसदी, उत्तराखंड में 11 फीसदी, बिहार में 38 फीसदी, पश्चिम बंगाल में 18 फीसदी और झारखंड में 26 फीसदी है। इन राज्यों में बारिश की कमी ने धान की बुवाई को प्रभावित किया है और खरीफ उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, मध्य भारत और दक्षिण प्रायद्वीप में अब तक सामान्य से अधिक बारिश हुई है। आईएमडी ने पूरे भारत में सामान्य से अधिक बारिश की भविष्यवाणी की है लेकिन पूर्व और उत्तर पूर्व में सामान्य से कम बारिश हुई है।

कम बारिश ने किसानों को दूसरी फसलों की ओर मोड़ा

कम बारिश ने किसानों को दूसरी फसलों की ओर मोड़ा

कृषि विशेषज्ञ काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर एसपी सिंह के मुताबिक, उत्तर प्रदेश और अन्य पूर्वी राज्यों में वर्षा की कमी दर्ज की गई है। इन राज्यों में भारत के कुल चावल उत्पादन का एक तिहाई पैदा होता है। इस वजह से बारिश ने बुवाई के पैटर्न में बदलाव को मजबूर कर दिया है। इससे धान की खेती में गिरावट आई है। कम बारिश पशुधन को भी प्रभावित करेगी और किसानों की आजीविका पर भारी असर डालेगी। यूपी ने 2021 में रिकॉर्ड धान उत्पादन हासिल किया था। 2021 में धान का रकबा बढ़कर 60 लाख हेक्टेयर हो गया, जो 2020 में 58.92 लाख हेक्टेयर था।

धान के उत्पादन में आएगी 30 लाख मीट्रिक टन तक गिरावट

धान के उत्पादन में आएगी 30 लाख मीट्रिक टन तक गिरावट

बारिश की कमी से इस साल धान के उत्पादन में करीब 30 लाख मीट्रिक टन का नुकसान होने की संभावना है। यूपी के कृषि विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में खरीफ फसल के उत्पादन में काफी कमी आने की संभावना है। बारिश की कमी की वजह से किसानों को अन्य फसलों की बुवाई शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। बुंदेलखंड के इलाकों में दलहन (दाल) की फसलों की बुवाई ज्यादा हुई है। खरीफ फसलों को मानसून के मौसम की शुरुआत से पहले बोया जाता है।

धान की कमी से किसानों की आजीविका भी प्रभावित

धान की कमी से किसानों की आजीविका भी प्रभावित

सिंह की माने तो भारत में कृषि क्षेत्र देश की लगभग आधी श्रम शक्ति को रोजगार देता है। भारत चावल का विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक भी है, जिसमें से खरीफ मौसम के दौरान वर्षा आधारित परिस्थितियों में पर्याप्त मात्रा में उगाया जाता है। इस प्रकार वर्षा में कमी किसानों की आजीविका को काफी हद तक प्रभावित करती है। कम उत्पादन एक तरह से काफी सामाजिक प्रभाव डाल सकते हैं। धान की कमी आज लगभग 8% है और कुल रकबा 5-6% कम हुआ है।

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