UP News: झांसी में मेडिकल कॉलेज में आग की घटना पर योगी सरकार का एक्शन, प्रिंसिपल को हटाया, 3 कर्मचारी निलंबित
UP News: उत्तर प्रदेश महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में 15 नवंबर को हुई भीषण आग की घटना के बाद राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। इस घटना में 17 नवजात शिशुओं की दर्दनाक मौत हो गई थी। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने जांच रिपोर्ट के आधार पर बड़े प्रशासनिक बदलाव और दंडात्मक कार्रवाइयां लागू की हैं।
जांच समिति की रिपोर्ट और कार्रवाई
घटना की जांच के लिए चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक किंजल सिंह के नेतृत्व में एक चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। जांच में कई गंभीर खामियां और लापरवाही उजागर हुई। इसके आधार पर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नरेंद्र सिंह सेंगर को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटा दिया गया और उन्हें चिकित्सा शिक्षा निदेशालय में स्थानांतरित कर दिया गया है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सचिन माहुर पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ औपचारिक आरोप तय किए गए हैं। इसके अलावा तीन अन्य कर्मचारियों को निलंबित किया गया। इन निलंबनों से सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि जिम्मेदारी तय की जाएगी और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

एनआईसीयू में आग, सुरक्षा पर सवाल
झांसी मेडिकल कॉलेज के नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में लगी इस भीषण आग ने चिकित्सा संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। आग की घटना ने बिजली उपकरणों की खराबी और सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुपालन में गंभीर चूक को उजागर किया। नवजात शिशुओं की दर्दनाक मौत ने माता-पिता और स्थानीय समुदाय में गहरा आक्रोश पैदा किया। सरकार ने सुनिश्चित किया है कि इस त्रासदी से जुड़े हर दोषी को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
सरकार की प्रतिक्रिया, सुरक्षा पर जोर
उत्तर प्रदेश सरकार ने घटना के बाद मेडिकल संस्थानों में सुरक्षा और प्रबंधन की खामियों को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर सुधारात्मक कदम उठाने की घोषणा की है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और सरकार सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में ऐसी त्रासदी न हो। सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू किया जाएगा। प्रोटोकॉल और प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है। ताकि चिकित्सा संस्थानों में देखभाल और सुरक्षा के उच्च मानक स्थापित किए जा सकें।
झांसी मेडिकल कॉलेज में 17 नवजात शिशुओं की मौत ने चिकित्सा संस्थानों में सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार ने दोषियों पर कार्रवाई करते हुए सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यह घटना चिकित्सा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करती है। ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।












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